नैनीताल , फरवरी 23 -- उत्तराखंड के हल्द्वानी में क्रिकेट लीग के नाम पर लाखों रूपये के कथित फर्जीवाड़ा के मामले में आरोपी विकास ढाका को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल पायी। उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं को निस्तारित कर दिया।

धोखाधड़ी के आरोपी विकास ढाका ने अपनी गिरफ्तारी को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। आरोपी की ओर से कहा गया कि उस पर लगाये गये आरोप गलत हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार उसकी गिरफ्तारी गलत है। उच्चतम न्यायालय की सात साल से कम सजा के मामलों को गैर संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है और इसलिये आरोपी की गिरफ्तारी गैर वाजिब है।

संज्ञेय मामलों में ही गिरफ्तारी की जा सकती है। उसमें भी आरोपी को गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी दी जानी आवश्यक है। यह भी कहा गया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के समय गलत दिखाया है। उसे सुबह थाना बुला लिया गया था और रात को गिरफ्तारी दिखाई गई।

आज दोनों मामलों पर सुनवाई हुई। सरकारी अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी को निचली अदालत से जमानत मिल गई है। इसलिए दोनों याचिकाओं का अब कोई महत्व नहीं है। इसके बाद अदालत ने याचिकाओं को निस्तारित कर दिया।

यहां बता दें कि आरोपी विकास ढाका के खिलाफ हल्द्वानी में गौलापार अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग (ईवीसीएल) के फर्जीवाड़ा में काठगोदाम थाना में दो मामले दर्ज हैं। एक मामला सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल जबकि दूसरा मामला झज्जर हरियाणा के लाल सिंह कालोनी निवासी दुष्यंत शर्मा की ओर से दायर किया गया है।

दोनों की ओर से ईवीसीएल के नाम पर 32 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। ईवीसीएल 01 फरवरी, 2026 से शुरू होनी थी। पूर्व विधायक श्री पाल की ओर से कहा गया कि उत्तराखंड सोल्जर्स टीम खरीदने के लिये आयोजकों के साथ 40 लाख में सौदा तय किया गया। उन्होंने 03 लाख रूपये नकद जबकि 06 लाख रूपये होर्डिंग्स लगाने के नाम पर खर्च किये।

इसी प्रकार दूसरी शिकायत में कहा गया कि यूपी वारियर्स टीम के लिये उससे 30 लाख रूपये में सौदा किया गया। आयोजक को 23 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया लेकिन क्रिकेट लीग शुरू नहीं की गयी।

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