भुवनेश्वर , अप्रैल 29 -- ओडिशा के क्योंझर जिले में एक आदिवासी व्यक्ति के अपनी मृत बहन की जमा पूंजी निकालने के लिए उसके कंकाल को बैंक ले जाने की चौंकाने वाली घटना पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करने का आदेश दिया है।

श्री माझी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उत्तरी संभाग के राजस्व मंडल आयुक्त (आरडीसी) को उन परिस्थितियों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया है जिनकी वजह से यह घटना हुई।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित व्यक्ति को जिला रेड क्रॉस फंड से 30,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई है। अधिकारियों ने मृत महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है, वहीं बैंक ने भी लंबित धनराशि जारी कर दी है।

इस दर्दनाक घटना से राज्य में भारी आक्रोश व्याप्त है। बीजू जनता दल (बीजद) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता और व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बताया है।

बीजद के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना को 'अत्यंत शर्मनाक और भयावह' बताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी जन-हितैषी शासन के आधिकारिक दावों के बावजूद कमजोर आदिवासी परिवारों द्वारा झेली जा रही कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।

बीजद नेता देवी प्रसाद मिश्र और सुदाम मरांडी ने कहा कि एरेंदेई पंचायत के दियनाली गांव की इस घटना ने राज्य का नाम खराब किया है और जमीनी प्रशासन तथा बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

श्री मिश्र के अनुसार, रायबू मुंडा और जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के साथ रहते थे, जिन्हें कथित तौर पर उनके पति ने छोड़ दिया था। रायबू की मृत्यु के बाद कलारा कुछ महीने पहले गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थी। हालांकि उनके बैंक खाते में लगभग 20,000 रुपये थे, लेकिन जीतू बैंक अधिकारियों के बार-बार असहयोग के कारण उनके इलाज के लिए पैसे नहीं निकाल सके। बाद में इलाज के अभाव में कलारा की मृत्यु हो गई।

आरोप है कि कलारा की मृत्यु के बाद भी जीतू की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि पैसा तभी निकाला जा सकता है जब कलारा खुद बैंक में पेश हो। कोई अन्य विकल्प न देखकर, वह अपनी बहन के अवशेषों को कब्र से निकालकर कंकाल को बैंक शाखा ले गया ताकि अपने ही परिवार की बचत पर दावा कर सके।

श्री मिश्र ने कहा कि यह विचलित करने वाली घटना बैंक अधिकारियों की संवेदनहीनता और प्रशासनिक जवाबदेही के पूरी तरह खत्म होने को दर्शाती है।

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