कौशांबी , अक्टूबर 20 -- कौशांबी के दारानगर में आयोजित दो दिवसीय दशहरा मेला के पहले दिन राम-रावण सेना के बीच संपन्न हुए कुप्पी युद्ध देखने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।
दारा शिकोह द्वारा बसाया गया दारानगर कस्बा में 247 वर्षों से निरंतर रामलीला का आयोजन होता आ रहा है। यहां दशमी और एकादशी तिथियों में दो दिन दशहरा मेला का आयोजन की पुरानी परंपरा जीवंत है। भादो पूर्णिमा को मुकुट पूजन से रामलीला की शुरुआत होती है। आसपास के गांव में पूरे नौ दिन रामलीला का सजीव मंचन किया जाता है । विजयदशमी के दिन चिन्हित युद्ध मैदान में राम रावण दल के योद्धाओं के बीच घमासान कुप्पी होता है।
राम दल के योद्धा गेरुआ वस्त्र धारण करते हैं जबकि रावण दल के योद्धा काली पोशाक में होते है। घड़ा की आकृति की प्लास्टिक की बनी हुई कुप्पी को दोनों दल के सैनिक शास्त्र के रूप में प्रयोग करते हैं। 90 के दशक तक युद्ध में प्रयुक्त होने वाली कुप्पिया ऊंट की खाल से निर्मित होती थी जिनका वजन 400 से 500 ग्राम होता था। इस युद्ध मे राम-रावण दल की सनाएं जब आमने-सामने युद्ध मैदान में होती हैं। आयोजक मंडल के महामंत्री की सीटी बजते ही दोनों दल के योद्धा एक दूसरे पर कुप्पी से प्रहार कर युद्ध करते हैं । इस युद्ध में आसुरी सेना रामदल की सेना पर भारी पड़ती है।
दोनों दलों के बीच दो मिनट का युद्ध राम रावण के बीच हुए युद्ध को जीवंत कर देता है। युद्ध बंद होनेकीसीटी बजतेही दोनों सेना के सैनिक युद्ध बंद कर देते हैं । आज मंगलवार को दोनों सेनाओं के बीच चार युद्ध संपन्न कराए गए। इस धर्म युद्ध में जो सैनिक घायल होता है। वह अपना इलाज किसी डॉक्टर से नहीं करता है बल्कि युद्ध भूमि की मिट्टी लगाकर स्वस्थ हो जाता है। इस अनोखे युद्ध को देखने के लिए पास पड़ोस के जिलों के अतिरिक्त देश के दूसरे प्रांतों से भी दर्शक दारानगर आते हैं। दशहरा मेला के दूसरे दिन यानी बुधवार को दोनों सेनाओं के बीच तीन युद्ध होंगे।
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