कानपुर , मार्च 03 -- होली की पूर्व संध्या पर कानपुर में जिलाधिकारी आवास का दृश्य विशेष रूप से भावुक और आत्मीय रहा। यहां कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के साथ रंगों का पर्व मनाया गया। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना से जुड़े बच्चों को आमंत्रित कर उनके साथ होली की खुशियां साझा की गईं। जिले में इस योजना से 22 बच्चे लाभान्वित हैं। इनमें से 10 बच्चे अपने परिजनों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि शेष 12 बच्चों के घरों पर पिचकारी, रंग, नए वस्त्र और मिठाई सहित उपहार भिजवाए गए।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी रश्मि सिंह ने बच्चों को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद वे बच्चों के बीच बैठकर उनसे संवाद करते नजर आए। किसी से पढ़ाई के विषय पूछे गए, तो किसी से भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। एक बच्चे ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, जबकि दूसरे ने इंजीनियर बनने का लक्ष्य बताया। जिलाधिकारी ने उनकी शैक्षणिक प्रगति की जानकारी लेते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, मार्गदर्शन अथवा अन्य किसी भी आवश्यकता में प्रशासन पूरी जिम्मेदारी के साथ इन बच्चों के साथ खड़ा रहेगा और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
कार्यक्रम में औपचारिकता की बजाय आत्मीयता का माहौल रहा। रंगों के बीच बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और प्रसन्नता साफ झलक रही थी। जिन बच्चों ने असमय अभिभावकों को खोया, उनके लिए यह आयोजन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भरोसे और सहारे का प्रतीक बनकर उभरा।
उल्लेखनीय है कि दीपावली पर भी जिला प्रशासन ने इन्हीं बच्चों के साथ त्योहार मनाया था। त्योहारों के माध्यम से निरंतर संवाद प्रशासन की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि संरक्षण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार में भी परिलक्षित होता है।
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए अपील की कि पर्व को शांति, संयम और जिम्मेदारी के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि रंगों का यह त्योहार तभी सार्थक है, जब इसकी खुशियां समाज के हर उस बच्चे तक पहुंचें, जिसे सहारे की आवश्यकता है।
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