कोल्हापुर , अक्टूबर 25 -- महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन (एसएसएस) ने रविवार को विशाल मोटरसाइकिल रैली निकाली। संगठन की मांग है कि चालू पेराई सत्र के लिए गन्ने का शुरुआती भुगतान 4,500 रुपये प्रति टन किया जाये।

एसएसएस के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता और गन्ना किसान रविवार सुबह अपनी मोटरसाइकिलों के साथ हातकणंगले में तहसीलदार कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। इसके बाद उन्होंने रैली शुरू की।

रैली जिले की कई प्रमुख चीनी मिलों के करीब से गुजरी। इनमें नरंदे स्थित शरद सहकारी चीनी मिल, वारणा नगर स्थित वारणा चीनी मिल, कुडित्रे स्थित मुंबई चीनी मिल और बिद्री स्थित बिद्री चीनी मिल शामिल हैं। किसानों और संगठन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए श्री शेट्टी ने गन्ने के मूल्य के मुद्दे का समाधान निकालने के लिए पहल नहीं करने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के रुख की तुलना पड़ोसी राज्य कर्नाटक से की।

श्री शेट्टी ने गन्ने के मूल्य को लेकर जारी विवाद के समाधान के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि श्री शिवकुमार ने बेलगावी में गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच विवाद सुलझाने के लिए आपात बैठक बुलाई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक महाराष्ट्र की चीनी मिलें गन्ना किसानों के लिए उचित शुरुआती अग्रिम भुगतान की घोषणा नहीं करतीं, तब तक उन्हें पेराई शुरू नहीं करने दी जाएगी।

गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति टन के शुरुआती भुगतान की मांग को लेकर पश्चिमी महाराष्ट्र में नए पेराई सत्र से पहले किसान संगठनों और चीनी मिलों के बीच विवाद तेज हो गया है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य देने की मांग कर रहे हैं, जबकि मिलों की ओर से शुरुआती भुगतान की घोषणा बातचीत का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।

निर्धारित मार्ग पर रैली में कई क्षेत्रों के किसान शामिल हुए। इससे इस मांग को लेकर किसानों की बढ़ती लामबंदी का संकेत मिला है और चीनी मिलों पर शुरुआती गन्ना मूल्य घोषित करने का दबाव बढ़ा है। रैली के शाम को कसबा सांगाव में समाप्त होने का कार्यक्रम है। वहां श्री शेट्टी के रैली में शामिल किसानों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करने की उम्मीद है।

यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब गन्ना किसान नए सत्र के लिए भुगतान को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चीनी मिलें उसकी मांग पूरी नहीं करतीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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