कोलार , अप्रैल 11 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। एक वन अपीलीय प्राधिकरण ने उन्हें कोलार जिले में 60.23 एकड़ कथित अतिक्रमित वन भूमि को वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने उनकी अपील को खारिज करते हुए अतिक्रमण के पिछले निष्कर्षों को सही ठहराया है।

वन संरक्षक द्वारा जारी अदालती आदेश के अनुसार, श्रीनिवासपुरा तालुक के होसाहुद्या गांव में स्थित विवादित भूमि को आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर वन विभाग को सौंपना होगा। प्राधिकरण ने यह भी निर्देशित किया है कि यदि श्री कुमार निर्धारित अवधि के भीतर अनुपालन करने में विफल रहते हैं, तो कोलार प्रभाग के उप वन संरक्षक बेदखली की कार्यवाही शुरू कर देंगे।

यह निर्णय राजस्व और वन अधिकारियों द्वारा किये गये कई संयुक्त सर्वेक्षणों के निष्कर्षों पर आधारित है, जिसमें जनवरी 2025 में किया गया एक व्यापक मूल्यांकन भी शामिल है, जिसने वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि की थी। यह मामला जिनागलकुंटे आरक्षित वन क्षेत्र की सर्वेक्षण संख्या 1 और 2 से संबंधित है, जहां अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि श्री कुमार के कब्जे वाली भूमि का एक बड़ा हिस्सा अधिसूचित वन सीमाओं के अंतर्गत आता है।

इस विवाद का लगभग दो दशकों का लंबा कानूनी इतिहास रहा है, जिसमें आरोप है कि कांग्रेस नेता ने क्षेत्र के किसानों से खरीदी गई वन भूमि पर अतिक्रमण किया है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार की अपीलों और कानूनी चुनौतियों के बावजूद, लगातार सर्वेक्षणों में लगभग 60 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है।

नवीनतम आदेश में श्री कुमार की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया है कि इसमें कोई दम नहीं है। आदेश में यह दोहराया गया है कि एक बार भूमि को वन भूमि के रूप में अधिसूचित कर दिये जाने के बाद, वह वन विभाग के पास सुरक्षित हो जाती है और राजस्व अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाती है।

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