नयी दिल्ली , अप्रैल 09 -- पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में सोना पप्पू' से जुड़े मामले को लेकर आठ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया और एक करोड़ 47 लाख रुपये नकद और लाखों रूपये का सोना बरामद किया।
कोलकाता स्थित (ईडी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। ईडी ने बताया कि यह मामला बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, जय एस. कामदार और अन्य लोगों से जुड़ा है। एक अधिकारी ने बताया कि तलाशी के दौरान 1.47 करोड़ रुपये की नकदी, 67.64 लाख रुपये के सोने के गहने और चांदी ज़ब्त की गयी। साथ ही कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गये।
कई अचल संपत्तियों की भी पहचान की गई है, जिनमें ज़मीन और इमारतें शामिल हैं। माना जा रहा है कि इन्हें आपराधिक गतिविधियों के ज़रिए हासिल किया गया था। इस अभियान के दौरान एक फॉर्च्यूनर गाड़ी भी ज़ब्त की गयी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू करता था।
इसके अलावा, कोलकाता के फ़र्न रोड स्थित उसके घर से "मेड इन यूएसए " लिखा हुआ एक रिवॉल्वर भी बरामद किया गया। इसे पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया है। यह कदम ईडी के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनके तहत वह पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 के चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त बनाने में सहयोग कर रहा है।
ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और शस्त्र कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर, बिस्वजीत पोद्दार और अन्य लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच शुरू की है। ये मामले दंगा करने, हत्या की कोशिश, आपराधिक साज़िश और शस्त्र कानून के उल्लंघन के आरोपों से जुड़े हैं।
ईडी के अनुसार, बिस्वजीत पोद्दार सहित आरोपी, पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक सिंडिकेट की गतिविधियों में शामिल थे और उन्होंने ऐसी गतिविधियों के ज़रिए बड़ी मात्रा में अवैध पैसा कमाया। कोलकाता में गोलपार्क के पास कंकुलिया रोड पर हुई हिंसा के एक मामले में भी पुलिस को उसकी तलाश है और वह फिलहाल फरार है। ईडी ने सोना पप्पू को समन जारी किया है। हालांकि, वह अब तक जांच में शामिल नहीं हुआ है।
जांच में आगे यह भी पता चला है कि अपराध से हासिल पैसा बिस्वजीत पोद्दार और उसके साथियों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के ज़रिए की गई अवैध गतिविधियों, जैसे कि रंगदारी, अवैध रूप से ज़मीन-जायदाद पर कब्ज़ा और बिना अनुमति के निर्माण कार्य से कमाया गया था।
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