कोलकाता , अक्टूबर 13 -- पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अलीमुद्दीन स्ट्रीट पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य मुख्यालय के बाहर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित चंडी पाठ ने राजनीतिक बयानबाजी को जन्म दिया।

आयोजकों का दावा था कि इस धार्मिक पाठ का मकसद वामपंथी नेताओं के मन में बदलाव लाना है। सुबह नौ बजे शुरू हुआ यह कार्यक्रम माकपा के राज्य मुख्यालय मुजफ्फर अहमद भवन के सामने एक अस्थायी मंच पर आयोजित किया गया। खुद को सनातनी हिंदू बताने वाले कई प्रतिभागियों ने लाउडस्पीकर के जरिए चंडी पाठ किया और दावा किया कि 'ये पवित्र श्लोक वामपंथी नेताओं को उनके पापों से मुक्त करने में मदद करेंगे।'एक प्रतिभागी ने कहा, "हम उनके कानों के पास लाउडस्पीकर से श्रीश्री चंडी के पवित्र मंत्रों का पाठ कर रहे हैं ताकि उन्हें उनके मन में जमा पापों से उबरने में मदद मिल सके। जब कोई पाप करता है, तो हो सकता है कि उसे यह एहसास न हो कि वह कुछ गलत कर रहा है या सही। मेरा मानना है कि जब ये मंत्र उनके कानों में जाएंगे, तो वे अपने पापों से मुक्त हो जाएंगे।"आयोजकों ने आरोप लगाया कि पिछले 50 वर्षों से इस इलाके में हिंदुओं को धार्मिक उत्सव आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई है। हाल के वर्षों में एजेसी बोस रोड पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा दुर्गा पूजा आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न समुदायों के निवासियों ने उत्सव में भाग लिया था। आर्थिक तंगी के कारण 2021 के बाद पूजा बंद कर दी गई।

माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोजक जो भी जरूरी समझते हैं, उसे करने के लिए स्वतंत्र हैं। श्री चक्रवर्ती ने कहा, "उन्हें ऐसा करने की जरूरत महसूस हुई, इसलिए उन्होंने ऐसा किया। इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है? अगर उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं है और वे मानते हैं कि चंडी पाठ करना ही उनकी एकमात्र जिम्मेदारी है, तो वे इसे सड़कों पर कर सकते हैं। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। असल में हर दिन चंडी पाठ करना अच्छी बात है।"एक अन्य माकपा नेता कल्तन दासगुप्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने पूरी जेन ज़ी पीढ़ी को ऐसे मंत्र सिखाए हैं कि पार्टी असलियत और सपनों के बीच का फ़र्क ही भूल गई है। कोई भी अपने धर्म का पालन करने के लिए आज़ाद है लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि अलीमुद्दीन स्ट्रीट के पास एजेसी बोस रोड पर ही ऐसा क्यों किया जाना चाहिए।"श्री दासगुप्ता ने कहा कि माकपा मुख्यालय में सभी का स्वागत है, सिवाय उन लोगों के जो दूसरे धर्मों के प्रति नफ़रत रखते हैं।

पार्टी ने मुज़फ़्फ़र अहमद भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक बैनर भी लगाया है, जिस पर लिखा है, 'सांप्रदायिक, जातिवादी और नस्लभेदी लोगों को छोड़कर सभी का स्वागत है' और साथ ही शारदोत्सव की शुभकामनाएं भी दी गई हैं।

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी बुकस्टॉल की मौजूदगी को लेकर बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कई संगठनों ने ऐसे स्टॉल के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की है, जिसके जवाब में माकपा नेतृत्व ने कहा है कि वे अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ेंगे। राज्यभर में बुकस्टॉल लगाने की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

यह विवाद एंटाली विधानसभा क्षेत्र में कामरडांगा सर्वजनीन दुर्गोत्सव समिति की पूजा के 107वें संस्करण से जुड़े एक और विवाद के बाद हुआ है। आयोजकों ने इस साल की मुख्य थीम के तौर पर 'हिंदू सनातन राष्ट्र' की अवधारणा चुनी और घोषणा की कि वामपंथी समूहों को पंडाल के अंदर या आस-पास बुकस्टॉल लगाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

उन्होंने इस फ़ैसले को सही ठहराते हुए वामपंथियों पर हिंदू धार्मिक भावनाओं को बार-बार आहत करने और हिंदू-विरोधी रुख़ अपनाने का आरोप लगाया।

इस तरह अलीमुद्दीन स्ट्रीट के बाहर 'चंडी पाठ' ने कोलकाता में त्योहारों के मौसम के दौरान धार्मिक अभिव्यक्ति, राजनीतिक विचारधारा और सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन की आज़ादी पर चल रही बहस में एक नया पहलू जोड़ दिया है।

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