कोरबा , जनवरी 12 -- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कोरबी क्षेत्र से सोमवार को एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया, जहां धान बिक्री के लिए टोकन न मिलने से मानसिक रूप से परेशान किसान ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। किसान की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबी निवासी 40 वर्षीय सुमेर सिंह गोड़ ने कल देर रात कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। किसान ने लगभग तीन एकड़ से अधिक भूमि खरीदी थी और 68 क्विंटल से अधिक धान बिक्री के लिए टोकन कटवाने में बीते डेढ़ महीने से भटक रहा था। मोबाइल फोन नहीं होने के कारण उसे टोकन प्रक्रिया में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कोरबी निवासी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि किसान ने टोकन कटवाने के लिए कई दुकानों, पटवारी और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाए। इसके बाद आवेदन दिया गया लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। किसान ने जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई, बावजूद इसके समस्या का निस्तारण नहीं हो सका।
किसान की पत्नी मुकुंद बाई ने बताया कि कल रात करीब एक बजे उनके पति ने कीटनाशक का सेवन किया। गिलास गिरने की आवाज सुनकर वह जागीं और पड़ोसियों की मदद से उन्हें पहले हरदी बाजार स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं और किसान का हालचाल जाना। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सांसद ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में किसानों को धान बेचने के लिए इस तरह की परेशानी नहीं होती थी।
सांसद महंत ने कहा कि उनके दौरे के दौरान कई किसानों की टोकन और रकबा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा, "जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, वहीं आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। जब अन्नदाता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज कैसे सुरक्षित रहेगा।"फिलहाल किसान की स्थिति नाजुक बनी हुई है और प्रशासन द्वारा मामले की जानकारी ली जा रही है।
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