रायपुर , जून 02 -- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र में विभिन्न मांगों को लेकर जारी ग्रामीणों का आंदोलन मंगलवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गया। मांगों के निराकरण में देरी से नाराज ग्रामीणों ने अंतागढ़ में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे भानुप्रतापपुर-नारायणपुर मार्ग पर यातायात बाधित हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
जानकारी के अनुसार, कोयलीबेड़ा क्षेत्र की 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीण पिछले छह दिनों से धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी देखी जा रही है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कोयलीबेड़ा में जिला सहकारी बैंक की स्थापना, ब्लॉक मुख्यालय को पुनः पखांजूर से कोयलीबेड़ा स्थानांतरित करना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की नियुक्ति, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना, डीएमएफ मद की राशि प्रभावित क्षेत्रों में पूर्ण रूप से व्यय करना, जर्जर स्कूलों एवं आश्रमों की मरम्मत, महाविद्यालय की स्थापना, पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध कराना, अंतागढ़-कोयलीबेड़ा मार्ग का डामरीकरण तथा तहसील को प्रशासनिक दृष्टि से अंतागढ़ अनुभाग से जोड़ने जैसी मांगें शामिल हैं।
इधर बालोद जिले में पाटेश्वर धाम से जुड़े मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड पार कर परिसर के भीतर पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने परिसर में ही भोजन बनाकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाटेश्वर धाम से जुड़े बालक दास के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। साथ ही 12 एकड़ से अधिक भूमि पर कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाने की मांग की गई है।
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