बिलासपुर , अप्रैल 03 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश के चर्चित कोयला लेवी और आर्थिक अपराध प्रकरण में आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका कल खारिज कर दी।
यह जानकारी आज सुबह एक वकील के माध्यम से मीडिया को दी गयी।
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के अपराध न केवल कानून व्यवस्था बल्कि आर्थिक तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं, इसलिए जमानत पर निर्णय लेते समय आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा दर्ज मामले से संबंधित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि राज्य में कोयला परिवहन से जुड़ा एक संगठित अवैध वसूली तंत्र सक्रिय था, जिसके जरिए प्रति टन तय राशि वसूली जाती थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से दो वर्षों के दौरान सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। मामले में कई प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता की भी बात सामने आई है।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत केस डायरी और दस्तावेजों में आरोपी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। उस पर वसूली की राशि के संग्रहण और वितरण में सक्रिय भागीदारी के आरोप हैं। जब्त अभिलेखों और गवाहों के बयानों में बड़ी रकम के लेनदेन का उल्लेख किया गया है, जिसका उपयोग विभिन्न गतिविधियों में किए जाने की बात भी सामने आई है।
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी को बिना ठोस साक्ष्यों के फंसाया गया है और मामला मुख्यतः सह-आरोपियों के बयानों पर आधारित है। वहीं, राज्य पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका गंभीर है और उसे जमानत देने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ तथा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपों की प्रकृति, साक्ष्यों की उपलब्धता और मामले की व्यापकता को देखते हुए जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।
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