बैतूल , अगस्त 27 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड के कोयलारी में प्रस्तावित सिंचाई बांध के निर्माण को लेकर किसानों और जल संसाधन विभाग के बीच चल रहे विवाद में विभाग ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है।

भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया पूरी किए बिना निर्माण शुरू करने के आरोपों पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीएल मरकाम ने कहा कि ठेकेदार ने केवल मौजा बारखेड़ के खसरा नंबर 114 और उसके बटांकन क्षेत्र में कार्य शुरू किया है। विभाग के अनुसार संबंधित किसान की सहमति लेने के बाद ही काम शुरू किया गया तथा फसल क्षति के एवज में 10 हजार रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था।

श्री मरकाम ने बताया कि निर्माण स्थल पर मक्के की फसल प्रारंभिक अवस्था में थी और निर्माण कार्य से उसे आंशिक क्षति हुई थी। आपसी सहमति के बाद 28 जुलाई 2026 को फोन-पे के माध्यम से किसान को 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति ऑनलाइन दी गई। विभाग का दावा है कि यह भुगतान निर्माण कार्य शुरू होने से पहले किया गया था।

विभाग ने स्पष्ट किया कि खसरा नंबर 114 के अलावा किसी अन्य किसान की निजी भूमि पर विभाग अथवा ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है। इससे उन आरोपों पर सवाल खड़े हुए हैं, जिनमें कई किसानों की जमीन पर बिना सहमति और मुआवजे के काम शुरू करने का दावा किया गया था।

इससे पहले ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। किसानों ने आरोप लगाया था कि कोयलारी, राबड़िया और घोड़ंगा क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान उनकी खड़ी फसल और पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने प्रभावित भूमि, फसल और पेड़ों का पंचनामा तैयार कर नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की थी।

जयस जिलाध्यक्ष संदीप धुर्वे ने आरोप लगाया था कि करीब सात करोड़ रुपये की लागत वाले बांध का निर्माण भूमि अधिग्रहण से संबंधित धारा 9 और 11 की कार्रवाई पूरी किए बिना शुरू किया गया है। उन्होंने निर्माण कार्य तत्काल रोकने और मामले की जांच कराने की मांग की थी। साथ ही कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी थी।

जल संसाधन विभाग के अनुसार योजना से प्रभावित भूमि के चिन्हांकन और भू-अर्जन प्रस्ताव तैयार करने के लिए सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है। भू-अर्जन का विधिवत प्रस्ताव शीघ्र ही स्वीकृति और अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है। विभाग ने कहा कि अन्य किसानों की निजी भूमि पर भू-अर्जन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य किया जाएगा।

विभाग के स्पष्टीकरण के बाद मामले में अब किसानों की शिकायत, जयस के आरोप और भू-अर्जन प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन और विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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