नयी दिल्ली, जून 05 -- विश्व विख्यात तमिलनाडु स्थित कोडाइकनाल सौर वेधशाला ने यह पता लगाने में मदद की है कि सूर्य पर विशाल संवहन पैटर्न सौर गतिविधि पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे भविष्य में सौर चक्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

चूल्हे पर उबलते पानी के बर्तन की तरह, सूर्य के भीतर उत्पन्न ऊर्जा संवहन द्वारा उसकी बाहरी परतों से होकर गुजरती है। संवहनी सेल सौर सतह पर एक नेटवर्क संरचना के रूप में छोटे पैमाने के कणिकाओं और बड़े पैमाने के अतिकणिकाओं के निर्माण का कारण बनते हैं।

नेटवर्क सेल का औसत जीवनकाल 24 घंटे है और इनका आकार लगभग 30,000 किमी है। ठंडी अंतरकणीय परतों की चौड़ाई लगभग 6000 किमी है। इन अतिकणीय संरचनाओं की उत्पत्ति क्या है, इनका आकार किस कारक से निर्धारित होता है और 11 वर्षीय सौर चक्र से इनका क्या संबंध है, ये सभी प्रश्न अब तक अनसुलझे हैं। कोडाइकनाल सौर वेधशाला से प्राप्त 100 वर्षों से अधिक के डेटा पर आधारित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के एक हालिया अध्ययन से इन प्रश्नों पर कुछ प्रकाश पड़ता है।

स्काईलैब के 1970 के दशक में प्रेक्षणों से पता चला है कि क्रोमोस्फेरिक नेटवर्क चरम पराबैंगनी (ईयूवी) नेटवर्क के रूप में संक्रमण क्षेत्र तक फैला हुआ है। यह नेटवर्क मध्य संक्रमण क्षेत्र में प्रमुख है और कोरोना में विघटित हो जाता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के वैज्ञानिकों ने सौर चक्र और लेन की चौड़ाई और तीव्रता जैसी दो भौतिक मात्राओं के बीच संबंध का अध्ययन किया।

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