कोटा , जुलाई 14 -- राजस्थान में कोटा विश्वविद्यालय में विश्व प्रसिद्ध बूंदी चित्र शैली को अब अकादमिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गयी है।
पारंपरिक कला के संरक्षण, संवर्धन और नयी पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से कोटा विश्वविद्यालय में बूंदी एवं कोटा चित्र शैली पर आधारित प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। इस संबंध में मंगलवार को कोटा विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. बी.एल. सारस्वत की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में पाठ्यक्रम की रूपरेखा और उसके व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. बी.एल. सारस्वत ने कहा कि भारतीय पारंपरिक कलाएं देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं और विश्वविद्यालय का दायित्व है कि उन्हें केवल संग्रहालयों तक सीमित न रखकर शिक्षा और शोध का हिस्सा बनाया जाये। उन्होंने कहा कि बूंदी चित्र शैली को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, वहीं स्थानीय कलाकारों के अनुभव और कौशल को अकादमिक मंच भी प्राप्त होगा। प्रो सारस्वत ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल कला संरक्षण के साथ-साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के नये अवसर भी सृजित करेगी।
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