कोच्चि , मार्च 07 -- केरल में कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डाले ईरानी नौसैनिक जहाज 'आईरिस लावन' के फिल्मांकन के आरोप में शनिवार को एक टीवी न्यूज चैनल के दो पत्रकारों सहित तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार रिपोर्टर सी जी शंकर, कैमरामैन एस मणि और नाव चालक पी विजयकुमार को उस समय हिरासत में लिया गया, जब उन्होंने बंदरगाह क्षेत्र के पास एक नाव से युद्धपोत के दृश्य कैद करने की कोशिश की। बंदरगाह की सुरक्षा के लिए जवाबदेह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में उन्हें हार्बर पुलिस को सौंप दिया।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने कहा कि इन तीनों ने उन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है, जो पूर्व अनुमति के बिना बंदरगाह क्षेत्र के भीतर जहाजों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के फिल्मांकन या फोटोग्राफी करने पर रोक लगाते हैं। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया जायेगा।
अधिकारियों ने आगाह किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण केरल तट पर लंगर डाले नौसैनिक या विदेशी सैन्य जहाजों का फिल्मांकन करना या उनकी तस्वीरें लेना सख्त प्रतिबंधित है। मीडिया संस्थानों से उन दृश्यों को हटाने के लिए भी कहा गया है, जो पहले ही ऑनलाइन प्रकाशित हो चुके हैं।
ईरानी युद्धपोत, 'आईरिस लावन' ने सप्ताह की शुरुआत में कोच्चि में तब लंगर डाला था, जब ईरान ने जहाज पर तकनीकी खराबी की रिपोर्ट के बाद आपातकालीन लंगर के लिए भारत से अनुमति मांगी थी। यह पोत 180 से अधिक चालक दल के सदस्यों के साथ पहुंचा था।
यह घटना इस क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाजों के प्रति बढ़ी हुई सतर्कता के बीच हुई है, क्योंकि इसी सप्ताह एक अन्य ईरानी युद्धपोत, 'आईरिस देना' के श्रीलंका के तट के पास डूबने की खबर आयी थी।
रिपोर्टों के अनुसार, पत्रकारों को तब हिरासत में लिया गया, जब उन्होंने कोच्चि में नौसैनिक प्रतिष्ठान के पास एक प्रतिबंधित उच्च-सुरक्षा क्षेत्र से फिल्मांकन करने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने तब हस्तक्षेप किया, जब पत्रकार बिना किसी पूर्व अनुमति के निषिद्ध क्षेत्र में दाखिल हुए।
पुलिस ने कहा कि नौसैनिक प्रतिष्ठानों के आसपास कड़े सुरक्षा नियम लागू हैं और ऐसे क्षेत्रों से फिल्मांकन या रिपोर्टिंग के लिए आधिकारिक अनुमति की आवश्यकता होती है। इस घटना के बाद सुरक्षा प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए पत्रकारों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।
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