अगरतला , फरवरी 15 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ माणिक साहा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार ने कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, हालांकि उन्होंने भारतीय मूल की स्वदेशी लिपि विकसित करने की प्राथमिकता पर जोर दिया है।

यह भाषा राज्य की जनजातीय समुदायों के लोग बोलते हैं। डॉ साहा ने कहा कि सरकार ने कोकबोरोक के लिए रोमन लिपि पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने स्वदेशी भाषा के लिए विदेशी लिपि के उपयोग पर चिंता व्यक्त की, जबकि इस मुद्दे के लिए समुदाय के नेताओं में जागरूकता को स्वीकार किया।

डॉ माणिक ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी लिपि को थोपा नहीं जायेगा और उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए जनजातीय भावनाओं के शोषण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कोकबोरोक के लिए बंगाली लिपि के ऐतिहासिक उपयोग और देवनागरी या अन्य भारतीय मूल की लिपियों को अपनाने के पिछले प्रस्तावों का उल्लेख किया।

डॉ साहा के अनुसार, राज्य में ऐसे भाषाई विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो कोकबोरोक के लिए एक उपयुक्त स्वदेशी लिपि विकसित करने में सक्षम हैं।

उन्होंने जनता से अपनी लिपि और भाषा के गौरव पर विचार करने का आग्रह किया । मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि छात्र चाहें, तो उन्हें रोमन लिपि में परीक्षा लिखने की अनुमति दी जायेगी।

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