कोंडागांव , मई 30 -- ) छतीसगढ़ के कोंडागांव जिले के माकड़ी क्षेत्र में आदिवासी समाज के पूर्वजों के सार्वजनिक श्मशान घाट (मरघट) पर कथित अतिक्रमण के मामले में राजस्व विभाग की जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई है। सीमांकन के बाद तहसीलदार ने संबंधित पक्ष को 10 दिनों के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला गोंडवाना समाज द्वारा 25 मई को एसडीएम कोंडागांव एवं तहसीलदार माकड़ी को ज्ञापन सौंपकर पूर्वजों के सार्वजनिक श्मशान घाट को कब्जा मुक्त कराने की मांग की गई थी। शिकायत पर जिला प्रशासन द्वारा संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए गए थे। राजस्व विभाग के अनुसार तहसीलदार माकड़ी ने शनिवार को शिकायतकर्ताओं एवं अनावेदक की उपस्थिति में राजस्व अमले और पुलिस बल के साथ मौके पर सीमांकन कराया। सीमांकन के दौरान शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की पुष्टि हुई तथा सार्वजनिक मरघट भूमि पर कब्जा पाया गया। मौके पर उपस्थित तहसीलदार ने संबंधित व्यक्ति को 10 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। राजस्व विभाग द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

गोंडवाना समाज की महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक अध्यक्ष रुक्मणी नेताम ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि निर्धारित समयावधि में अतिक्रमण हटाए जाने की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि यदि कब्जा नहीं हटाया गया तो समाज पुनः प्रशासन से कार्रवाई की मांग करेगा। जिला अध्यक्ष पनकुराम ने बताया कि समाज के पूर्वज पिछले कई दशकों से उक्त स्थल का उपयोग अंतिम संस्कार एवं दफन क्रिया के लिए करते आ रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि माकड़ी निवासी एक व्यक्ति ने मरघट क्षेत्र में मिट्टी भराई कर घेराबंदी करते हुए ईंट निर्माण मशीन स्थापित कर दी थी, जिससे समुदाय को अंतिम संस्कार संबंधी कार्यों में परेशानी हो रही थी। सीमांकन के दौरान गायता संतराम पोयाम, माटी पुजारी गुड़राम पोयाम सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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