कोंडागांव , मई 12 -- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की पुलिस ने शादी का प्रलोभन देकर पीड़िता का वर्षों तक यौन शोषण करने वाले आरोपी को त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया है,जिसकी जानकारी मंगलवार को पुलिस ने दी।
आपोपी की पहचान जयनाथ कोर्राम, पिता पूरण कोर्राम, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम चिपावंड, थाना कोंडागांव, जिला कोंडागांव के रूप में हुई है।
पीड़िता ने 11 मई 2026 को थाना कोंडागांव में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वर्ष 2021 से उसका ग्राम चिपावंड निवासी जयनाथ कोर्राम के साथ प्रेम संबंध था। आरोपी द्वारा शादी का झांसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाए गए और वर्ष 2025 तक यह सिलसिला चलता रहा। पीड़िता द्वारा शादी की बात करने पर आरोपी टालमटोल करता रहा और अंततः शादी से इनकार कर दिया।
पीड़िता की शिकायत पर थाना कोंडागांव में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कोंडागांव एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी कोंडागांव के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पंकज.अभयवार्ताबीजापुर में पेसा उल्लंघन मामले में ग्रामीणों ने तहसीलदार के खिलाफ एसडीएम को सौंपा ज्ञापनबीजापुर, 12 मई (वार्ता) छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गोटाईगुड़ा में पारंपरिक ग्रामसभा के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम भोपालपटनम को ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार पर पेसा कानून के उल्लंघन, ग्रामसभा के अधिकारों के हनन और जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को इससे संबंधित ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्य सचिव, आदिम जाति विभाग, बस्तर संभाग आयुक्त, जिला अनुसूचित जनजाति आयोग, सांसद एवं विधायक को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा गोटाईगुड़ा ने खसरा नंबर 61/12 की 0.400 हेक्टेयर भूमि को "आदिवासी सामाजिक भवन" निर्माण हेतु सुरक्षित करने का निर्णय लिया था, जो PESA नियम 2022 की धारा-4 के तहत वैधानिक है। इसके बावजूद तहसीलदार भोपालपटनम ने 29 अप्रैल 2026 को ग्रामसभा पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस निर्णय को "शासकीय कार्य में बाधा" बताया।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 244(1) और पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत है। ग्रामीणों ने यह भी आपत्ति जताई कि नोटिस में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का हवाला देते हुए ग्रामसभा प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जबकि सरपंच, पटेल और माटी पुजारी शासकीय कर्मचारी नहीं हैं।
ग्रामीणों ने संबंधित तहसीलदार के खिलाफ विभागीय जांच एवं निलंबन की मांग करते हुए नोटिस को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारियों के लिए "संवैधानिक साक्षरता" कार्यशाला आयोजित करने की मांग भी उठाई गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र न्याय नहीं मिला तो बस्तर संभाग की ग्रामसभाएं लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगी।
इस दौरान माटी पुजारी शिवराम, पटेल दशरथ, सरपंच सरिता गोटे, एटी शंकर, पारेट बापू, तोडेम चन्द्रैया, वासम राकेश, कोरम लक्ष्मीनारायण सहित 150 से अधिक ग्रामीण मौजूद रहे।
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