बीजापुर, फरवरी 03 -- सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा को जमानत प्रदान कर दी है। लखमा जनवरी 2025 से इसी मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध थे। अदालत ने जमानत पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कोंटा सीट से विधायक कवासी लखमा को जमानत मिलने के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र कोंटा समेत पूरे बस्तर में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता। झूम उठे हैं।

जमानत के आदेश की सूचना मिलते ही 3 फरवरी को बीजापुर जिला कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटी और पटाखे फोड़े। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को न्यायपालिका पर जनता के विश्वास की जीत और सत्य की सफलता बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखमा को राजनीतिक द्वेष के चलते लंबे समय तक जेल में रखा गया और यह फैसला उनके पक्ष में आया है। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि न्याय अंततः सत्य के साथ खड़ा होता है और लखमा शीघ्र ही पूरी तरह निर्दोष साबित होंगे।

हालांकि, इस फैसले और जमानत की शर्तों पर प्रतिक्रियाएं विभाजित रहीं। कई आदिवासी संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों ने जमानत की कुछ शर्तों पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि लखमा पर लगाई गई छत्तीसगढ़ राज्य और उनके गृह क्षेत्र बस्तर से बाहर रहने की शर्त उनके नैसर्गिक एवं संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने इसे एक आदिवासी नेता के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार बताते हुए कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को उसके क्षेत्र और समुदाय से अलग करना न्यायसंगत नहीं है।

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