रामनगर , अप्रैल 07 -- उत्तराखंड के रामनगर में स्थित विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में इस वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पर्यटकों की संख्या और राजस्व में गिरावट दर्ज की गई है।

एक ओर हर साल लाखों पर्यटक यहां वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं, वहीं इस बार आंकड़ों में आई कमी ने वन विभाग और पर्यटन से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

कॉर्बेट पार्क प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में कुल 4,00,946 पर्यटकों ने पार्क का भ्रमण किया। इसमें 3,89,997 भारतीय और 10,949 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इस दौरान पार्क को पर्यटन से कुल 27 करोड़ 75 लाख 28 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 से तुलना में इस बार गिरावट साफ दर्ज की गई है, वर्ष 2024-25 में कुल 4,59,395 पर्यटक कॉर्बेट पहुंचे थे, जिनमें 4,48,095 भारतीय और 11,300 विदेशी पर्यटक शामिल थे। यानी इस साल करीब 58 हजार से ज्यादा पर्यटक कम पहुंचे, जिसका सीधा असर राजस्व पर भी पड़ा है।

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और अन्य वैश्विक परिस्थितियों का असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर पड़ा है। वहीं घरेलू स्तर पर भी कुछ व्यवस्थागत और आर्थिक कारण सामने आ रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों और नेचर गाइड्स ने इस गिरावट को लेकर कई अहम बिंदु उठाए हैं। वरिष्ठ नेचर गाइड संजय छिमवाल का कहना है कि सफारी शुल्क में बढ़ोतरी इसका एक बड़ा कारण है। उनके अनुसार मध्यमवर्गीय पर्यटक अब यात्रा से पहले खर्चों का अधिक आकलन करते हैं और महंगे विकल्पों से बचने लगे हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था भी पर्यटकों के लिए चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर ढिकाला जैसे लोकप्रिय जोन में समय पर बुकिंग नहीं मिल पाने के कारण कई पर्यटक अन्य स्थानों का रुख कर लेते हैं।

कॉर्बेट के आसपास विकसित हो रहे वैकल्पिक पर्यटन जोन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। सीताबनी और फाटो जैसे क्षेत्रों में टाइगर साइटिंग की बेहतर संभावनाएं और सोशल मीडिया पर प्रचार ने पर्यटकों को आकर्षित किया है। जहां फाटों में नाइट स्टे जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होने लगी हैं, जिससे पर्यटक इन क्षेत्रों में अधिक समय बिताना पसंद कर रहे हैं।

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