जयपुर , जुलाई 31 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि कॉमनवेल्थ शांति मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न्याय व्यवस्था में एक नई सोच, नई दिशा और नए वैश्विक दृष्टिकोण की शुरुआत है।
श्री शर्मा ने शुक्रवार को यहां सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि न्याय में एक पक्ष जीतता और दूसरा हारता है जबकि संवाद और मध्यस्थता हार-जीत से आगे बढ़कर समाधान की बात करते हैं। इससे पक्षकारों के बीच वर्षों से चली आ रही कटुता, अविश्वास और मानसिक टकराव समाप्त होता है। साथ ही, भविष्य में विवाद की कोई संभावना भी नहीं बचती है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में मध्यस्थता एक कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया ही नहीं बल्कि समाज की वह सांस्कृतिक शक्ति है जो सदियों से हमें आपस में जोड़े हुए है। हमारे न्यायिक तंत्र की समृद्ध परंपरा में अदालत के बाहर समझौता करना आदर्श रहा है, अपवाद नहीं। सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने का काम हमारे यहां पंचायतें करती आई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में संस्थागत मध्यस्थता को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र की स्थापना की गई है, जिससे देश में विवादों का त्वरित एवं विश्वसनीय समाधान का रास्ता खुला है। इसी प्रकार मध्यस्थता अधिनियम, 2023 लागू कर मध्यस्थता को विवाद समाधान का एक प्रभावी, सरल और भरोसेमंद माध्यम भी बनाया।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में हर व्यक्ति को न्याय सुलभ कराने के लिए राज्य सरकार संकल्पित होकर कार्य कर रही है। इसके तहत बंदियों एवं बाल अपचारियों को विधिक सेवाएं एवं सहायता योजना, 2015 में पांच लाख 85 हजार प्रकरणों में विधिक सहायता एवं राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत लगभग चार हजार पीड़ितों को 84 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिकर राशि दी गई है। वहीं, एक लाख 20 हजार विधिक साक्षरता शिविर आयोजित कर करीब 77 लाख लोगों को लाभान्वित किया गया है।
श्री शर्मा ने कहा कि वैकल्पिक विवाद निस्तारण के तहत मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से 21 हजार से अधिक प्रकरणों तथा मीडियेशन फॉर नेशन अभियान के तहत लगभग 22 हजार प्रकरणों का निस्तारण मध्यस्थता से किया गया है।
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