छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) , अगस्त 01 -- केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को यहां सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ' भारतीय कपास निगम लि. (सीसीआई) के 56वां स्थापना दिवस पर आयोजित मुख्य समारोह में कपास किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध जताते हुए उन तक सूचनाएं पहुंचाने के लिए 'कपास दर्शन' बुलेटिन का शुभारंभ किया।
श्री सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा कि कपास भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता और कृषि समृद्धि का आधार है तथा सरकार कपास किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कपड़ा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार 'कपास दर्शन' बुलेटिन सके माध्यम से किसानों को समय-समय पर मौसम संबंधी जानकारी, बाजार भाव, वैज्ञानिक खेती की सलाह, गुणवत्ता प्रबंधन, तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, कपड़ा मंत्री संजय सावकारे, अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण, डेयरी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा एवं दिव्यांग कल्याण मंत्री अतुल सावे, वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (फाइबर) पद्मिनी सिंगला, वस्त्र आयुक्त, भारत एवं महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के कार्यकारी निदेशक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, वस्त्र उद्योग के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन तथा बड़ी संख्या में कपास किसान उपस्थित थे।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री सिंह ने कहा कि कपास विपणन सत्र 2025-26 के दौरान सीसीआई ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत लगभग 522 लाख क्विंटल कपास की खरीद की जिसमें करीब 24 लाख किसानों ने भाग लिया। किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे 41,530 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। मंत्री ने इसे सीसीआई के अब तक की सबसे बड़े खरीद अभियानों में एक बताया।
सरकार ने कपास विपणन सत्र 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य लगभग 7 प्रतिशत बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ' कपास उत्पादकता मिशन - कपास क्रांति के लिए सरकार ने पांच साल में 5,659 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया है जिससे कपास क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन होंगे। इस मिशन का उद्येश्यकपास की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाना, कपास प्रसंस्करण अवसंरचना का आधुनिकीकरण, 'कस्तूरी कॉटन भारत' के माध्यम से ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी (उत्पाद की पहचान और स्रोत का पता लगाने की व्यवस्था) को बढ़ावा देना तथा स्वस्थ एवं जलवायु-अनुकूल कपास खेती को प्रोत्साहित करना है।
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