जशपुर , अगस्त 17 -- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रसिद्ध शिवधाम कैलाश नाथेश्वर गुफा के आसपास के जंगल में 16 हाथियों के दल की मौजूदगी ने सावन सोमवार पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गुफा में जलाभिषेक के लिए आज हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वन विभाग के अनुसार रविवार को 16 हाथियों का दल मैनी और बिमड़ा के जंगल में विचरण कर रहा था। कैलाश नाथेश्वर गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को इसी वन क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। सावन सोमवार होने के कारण आज इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में हाथियों के सड़क अथवा श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले रास्तों के आसपास पहुंचने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

वन विभाग की टीमें मैनी-बिमड़ा के जंगल में हाथियों के दल की लगातार निगरानी कर रही हैं। वनकर्मी दल की लोकेशन और उसके गतिविधि की दिशा पर नजर रखे हुए हैं, ताकि हाथियों के आबादी अथवा श्रद्धालुओं के मार्ग की ओर आने पर समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके। ग्रामीणों से भी जंगल में अनावश्यक रूप से प्रवेश नहीं करने और हाथियों के करीब नहीं जाने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि, कैलाश नाथेश्वर गुफा में सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवर लेकर जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। जशपुर जिले के बगीचा, सन्ना, सुलेसा, महनई, नारायणपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के अलावा बतौली, रघुनाथपुर और अंबिकापुर क्षेत्र से भी श्रद्धालु पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं।

कांवर यात्रियों के लिए मुख्य सड़क के अलावा जंगल से होकर गुजरने वाले कम दूरी के रास्ते भी प्रचलित हैं। सन्ना और सोनक्यारी क्षेत्र से आने वाले कई श्रद्धालु गायबुड़ा के रास्ते, जबकि बगीचा क्षेत्र के श्रद्धालु अहिंदमाड़ा के रास्ते जंगल पार कर कैलाश नाथेश्वर गुफा तक पहुंचते हैं। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग से गुफा तक पहुंचाना प्रशासन के लिए प्रमुख चुनौती बन गया है।

सावन सोमवार को जशपुर के साथ सरगुजा और रायगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु कैलाश नाथेश्वर गुफा पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रहती है कि गुफा के भीतर स्थित मंदिर में जलाभिषेक के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर तक कतार लग जाती है। सावन मास में यहां व्यवस्था संभालने में संत गहिरा गुरू संस्कृत महाविद्यालय के छात्र भी सहयोग करते हैं। इसके अलावा पुलिस जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है।

इस बीच हाथियों के इसी दल द्वारा हाल में एक ग्रामीण की जान लेने की घटना के कारण आसपास के क्षेत्रों में पहले से दहशत है। गत 09-10 अगस्त की मध्य रात्रि को बगीचा वन परिक्षेत्र के ग्राम घुघरी कदमटोली में हाथियों का दल बस्ती में घुस गया था और एक ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया था।

जानकारी के अनुसार हाथियों का यह दल कांसाबेल वन परिक्षेत्र से बगीचा क्षेत्र में पहुंचा है। वन विभाग की कोशिश दल को बादलखोल अभयारण्य की ओर ले जाने की थी लेकिन हाथियों ने विपरीत दिशा में मूवमेंट किया। वर्तमान में दल सरगुजा की दिशा में बढ़ रहा है।

कैलाश नाथेश्वर गुफा में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए फिलहाल वन विभाग और प्रशासन का पूरा ध्यान हाथियों की गतिविधियों की निगरानी तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने पर केंद्रित है।

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