, Nov. 3 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की अपनी जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में बिहार को केवल चार महीने जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में ही गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है। कृषि, उद्योग और पेयजल की जरूरतों को देखते हुए बिहार को पर्याप्त पानी मिलना आवश्यक है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क बनाने का भी आग्रह किया।

श्री चौधरी ने कहा कि गाद का उपयोग केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य में विकसित की जा रही विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। बिहार में 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और मां सीता की जन्मस्थली पर सीतापुरम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 10 नए एयरपोर्ट और 32 मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार में एनएचएआई की 58,340 करोड़ रुपये की लागत वाली 39 परियोजनाएं, जिनकी कुल लंबाई 1,561 किलोमीटर है, निर्माणाधीन हैं। वहीं, 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि 'नदी संजीवनी' के तहत 243 लाख घनमीटर मुफ्त गाद का उपयोग 16 चालू राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। राज्य की विभिन्न नदियों पर 29 नए पुलों का निर्माण भी चल रहा है।

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