भुवनेश्वर , अक्टूबर 05 -- ओडिशा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (बीजद) सरकार पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा में 29 सितंबर को पेश छह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्टों में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) और पर्यटन क्षेत्र में गंभीर खामियां सामने आयी हैं।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं इंडस्ट्रीज सेल के प्रमुख डॉ तपन चंद ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कैग की रिपोर्टों में डीएमएफ निधि के प्रबंधन और इस्तेमाल में कई अनियमितताएं सामने आयी हैं।
उन्होंने कैग के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि खनन से सीधे प्रभावित नहीं होने वाले गांवों में 983 करोड़ रुपये खर्च किये गये, जबकि खनन प्रभावित 584 गांवों को डीएमएफ से कोई परियोजना या वित्तीय सहायता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समुदायों, अनुसूचित जातियों और अन्य खनन प्रभावित लोगों को उनके निर्धारित लाभों से वंचित होना पड़ा।
श्री चंद के अनुसार, क्योंझर में 2015 से 2024 के बीच 9,733.37 करोड़ रुपये की 3,269 डीएमएफ परियोजनाएं मंजूर की गयीं। इनमें से 757 परियोजनाएं यानी करीब 23 प्रतिशत परियोजनाएं कार्यकारी समिति या न्यासी बोर्ड की मंजूरी के बिना लागू की गयीं।
उन्होंने कहा कि उचित निवेश संबंधी फैसले नहीं लिये जाने के कारण क्योंझर डीएमएफ को 84.51 करोड़ रुपये का ब्याज नुकसान हुआ। इसी तरह ढेंकानाल में 2.44 करोड़ रुपये, मयूरभंज में 6.85 करोड़ रुपये और नबरंगपुर में 20 लाख रुपये के ब्याज नुकसान का दावा किया गया।
पर्यटन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 103.35 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका और उसे वापस करना पड़ा, जबकि 898.48 करोड़ रुपये एजेंसी के बैंक खातों में पड़े रहे। उन्होंने दावा किया कि इन निधियों से अर्जित 59.25 करोड़ रुपये का ब्याज भी न तो इस्तेमाल किया गया और न ही वापस किया गया।
उन्होंने कहा कि इको रिट्रीट कार्यक्रम में 207.68 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पुरी प्रसाद परियोजना पर 6.49 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद इसे बीच में ही छोड़ दिया गया। इसी तरह बिंदुसागर फ्लोटिंग म्यूजिकल फाउंटेन परियोजना पर 8.16 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हो सकी और विफल रही। नौका किराये के क्षेत्र में एक निजी एजेंसी से 1.42 करोड़ रुपये की राशि वसूल नहीं किये जाने का भी दावा किया गया।
श्री चंद ने कहा कि कैग रिपोर्टों में सामने आये वित्तीय और प्रशासनिक सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गये हैं।
भाजपा ने खनिज संसाधनों से संबंधित नीतियों को लेकर भी पूर्ववर्ती सरकार पर सवाल उठाये। श्री चंद ने कहा कि राज्य का खनन राजस्व 2015 से पहले 5,000 करोड़ रुपये से कम था, जो 2025-26 में बढ़कर 51,000 करोड़ रुपये हो गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2005 से 2015 के बीच खनिज संसाधनों की नीलामी व्यवस्था लागू नहीं किये जाने के कारण ओडिशा को करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि नीलामी व्यवस्था लागू होने पर राज्य को हर वर्ष कम से कम 17,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल सकता था।
श्री चंद ने कहा कि पूर्ववर्ती बीजद सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन की व्यवस्था का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए अपेक्षित तरीके से नहीं किया।
उल्लेखनीय है कि ओडिशा विधानसभा में 29 सितंबर को पेश कैग की रिपोर्टों में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में वित्तीय, प्रशासनिक और परियोजना क्रियान्वयन से जुड़ी खामियों को रेखांकित किया गया है।
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