नागपुर/मुंबई , जुलाई 11 -- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' को लागू करने में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए इसमें 3,541.16 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च, खर्च पर नियंत्रण और वित्तीय प्रबंधन में कमियों का ज़िक्र किया है।
महाराष्ट्र विधानसभा में शुक्रवार को पेश की गई कैग की 2024-25 की राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस योजना के लिए मंज़ूर किए गए 29,693.09 करोड़ रुपये के मुकाबले 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके परिणामस्वरूप, बिना किसी ठोस कारण के 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में निकाले गए 15,586 करोड़ रुपये को तुरंत इस्तेमाल करने के बजाय 'वर्चुअल पर्सनल डिपॉज़िट अकाउंट्स' (वीपीडीए) में स्थानांतरित कर दिया गया। कैग ने जांच में पाया कि इससे पता चलता है कि वह धनराशि बिना किसी ज़रूरत के निकाली गयी थी जो बजटीय अनुशासन और वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के लिए 26,200 करोड़ रुपये पूरक बजट के ज़रिए दिए गए थे, जबकि 3,490.75 करोड़ रुपये की राशि को पुनः आवंटित किया गया था, जिससे कुल उपलब्ध अनुदान राशि 29,693.09 करोड़ रुपये हो गई।
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