नयी दिल्ली , अक्टूबर 14 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना और लेखिका डॉ. आनंदा शंकर जयंती की संस्मरणात्मक पुस्तक 'डांसिंग विद जॉय' का विमोचन किया।
डॉ. जयंती ने इस पुस्तक में कैंसर से संघर्ष के अपने अनुभव साझा किए हैं। इसमें बताया गया है कि किस तरह नृत्य के प्रति उनके जुनून और दृढ़ संकल्प ने उन्हें बीमारी का सामना करने की शक्ति दी। पुस्तक का संदेश है कि कैंसर से आगे भी जीवन को नये दृष्टिकोण और आनंद के साथ जिया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक नृत्य और आनंद की कहानी से कहीं बढ़कर है। यह जुनून, कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने की शक्ति का प्रेरणादायक वृत्तांत है। उन्होंने कहा कि कैंसर से डॉ. जयंती का संघर्ष बताता है कि जीवन के कठिन क्षणों में जुनून संबल बन सकता है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि जागरूकता, शीघ्र पहचान और समय पर उपचार से कैंसर से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश में कैंसर देखभाल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत 700 से अधिक जिला क्लीनिक और 500 डे-केयर कैंसर केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि 19 राज्य कैंसर संस्थानों और 20 तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्रों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और फरवरी 2026 में शुरू किए गए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का भी उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने कैंसर और अन्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों से निराश न होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और हर असफलता सीखने तथा नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर देती है। उन्होंने कैंसर मरीजों की देखभाल में परिवारों और स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जुनून, निरंतर अभ्यास और समर्पण से प्रतिभा को उत्कृष्टता में बदला जा सकता है।
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