जालंधर , जुलाई 03 -- राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने हाल ही में 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगा' में जारी अपनी एक शोध रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया में हर छठी मौत कैंसर के कारण होती है। कैंसर को नियंत्रित करने में अध्यात्म की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है, क्योंकि अध्यात्म से व्यक्ति को आत्मविश्वास एवं मानसिक बल मिलता है।

उन्होंने कहा कि यदि जिजीविषा एवं हौसला हो तो कैंसर को भी पस्त किया जा सकता है।

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ पुरोहित ने शुक्रवार को यहां जारी एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया कि अध्यात्म के सहारे से जीवन की यात्रा को सुगम एवं सरल किया जा सकता है। इसे एक पारंपरिक उपचार प्रणाली के रूप में जाना जाता है, जो पूरे शरीर, मन और आत्मा में ऊर्जा के संतुलन और प्रवाह को पुनर्स्थापित करती है। इस प्रकार दवाई हमारे शरीर के अंदर जाकर बीमारी को ठीक करती है, ठीक उसी प्रकार आध्यात्मिक इलाज हमारे मन को मजबूत बना कर किसी भी बीमारी से लड़ने की हिम्मत देता है।

जाने-माने शोधार्थी ने बताया कि सुख-दुख, विपदाएं, वेदना, परेशानियां, कठिनाइयां और बीमारियों का सामना करते-करते व्यक्ति के अंदर से सकारात्मक ऊर्जा खत्म होने लगती है, जिस कारण से व्यक्ति थक जाता है और अंदर से टूट जाता है। यह टूटन एवं निराशा कैंसर की सबसे बड़ी बाधा है।

उन्होंने जोर देकर बताया कि अध्यात्म में वह शक्ति है, जो हारे हुए व्यक्ति के जीवन में नयी ऊर्जा भर देता है। अध्यात्म के बहुत सारे अंग हैं जैसे- योग, प्राणायाम, मंत्र साधना, ध्यान, आदि। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने आप को भीतर से मजबूत बना सकता है। यही वजह है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में अध्यात्म को अपना लेता है, वह कैंसर से जुड़ी हर पीड़ा, वेदना एवं हर परिस्थिति का डटकर सामना करता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में कभी हार नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंसर संक्रामक रोग नहीं है। कैंसर के मरीजों से दूरी न बनायें, बल्कि उनके साथ जुड़कर उनको मानसिक संबल दें, उनमें सकारात्मक सोच विकसित करें। कैंसर की जंग में सकारात्मक सोच रोगी का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है।

डॉ पुरोहित ने बताया कि पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह हों या कई बॉलीवुड सितारे, सबने अपनी सकारात्मक सोच के जरिए ही कैंसर पर विजय हासिल की है। सकारात्मक सोच वाले शरीर पर ही दवाइयां अपना असर दिखती हैं। इसलिए कभी भी व्यक्ति को हताश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग से शरीर, मन और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। योग तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में भी सहायक है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मानसिक तनाव को दूर करता है। रोजाना 30 मिनट तक योग करके कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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