तिरुवनंतपुरम , जनवरी 13 -- केरल ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (केसीएचआर) से प्रकाशित छह शोध पुस्तकें केरल विधान सभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (केएलएआईबीएफ) 2026 के हिस्से के रूप में विधान सभा परिसर में जारी की गयीं हैं।

प्रख्यात मानवविज्ञानी डॉ ए अयप्पन के चुनिंदा लेखों का संग्रह 'इंस्टीट्यूशंस, इंडिविजुअल्स, एंड प्रैक्टिसेज: एंथ्रोपोलॉजिकल एसेज' की पहली प्रति केरल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो राजन गुरुक्कल को भेंट की गयी। इस पुस्तक का संपादन प्रशांत माधव और रफी नीलम कविल ने किया है।

डेविस सी जे की पुस्तक 'ह्वेन कोचिन बिकेम सिडेड डे कोचिम (1527-1616)' का अनुवाद प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक पुर्तगाली काल के दौरान कोच्चि का गहरा विश्लेषण करती है। यह सोलहवीं और सत्रहवीं सदी की शुरुआती औपनिवेशिक प्रशासनिक संरचना पर जरूरी दस्तावेज हैं। इसकी पहली प्रति केरल भाषा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर कार्तिकेयन नायर को दी गयी।

राज्य में कलामेलुतु परंपरा पर केंद्रित डॉ. शिबी के की पुस्तक 'लिनिऐजेज ऑफ केरल कलामेलुतु' की पहली प्रति पुरातत्व विभाग निदेशक डॉ दिनेश्न ई को भेंट की गयी, जबकि 'अयप्पन हाइम्स ऑफ कलामेलुतु इन नॉर्थ मालाबार' की पहली प्रति कलाकार सजिता आर शंकर को दी गयी। केसीएचआर के स्रोत्र सामग्री शृंखला के तहत अर्नस पथिरी की पुस्तक 'कूथासप्पना' की प्रति राज्य अभिलेखागार विभाग की प्रभारी निदेशक पार्वती एस. को मिली।

इस शृंखला के एक अन्य प्रमुख कार्य 'कण्णालोक केरलोल्पत्ति' पुस्तक में दर्ज की गयी है। इसमें आसारी, मुषारी, थट्टन और करुमन (कन्नालार) जैसी व्यावसायिक समुदायों की उत्पत्ति दर्ज की गयी है। इसे केएमपी दामोदरन नम्बूतिरि, चित्रा के और के पी राजेश ने संयुक्त रूप से लिखा है। इसकी प्रति केरल विश्वविद्यालय के मलयालम विभाग की प्रोफेसर सीमा जेरोम को भेंट की गयी।

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