कोच्चि , अक्टूबर 16 -- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के दिशा निर्देश में कहा गया है कि केश प्रत्यारोपण (हेयर ट्रांसप्लांट) का काम केवल उचित रूप से प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त डॉक्टरों द्वारा ही किया जाना चाहिए। केरल के कोच्चि में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद एक मरीज को गंभीर संक्रमण होने की घटना के मद्देनजर, ये दिशा निर्देश काफी महत्वपूर्ण हो गये हैं।
आयोग के 'एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड' (ईएमआरबी) द्वारा जारी दिशा निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसके लिए विशेष चिकित्सीय प्रशिक्षण, सही बुनियादी सुविधायें और किसी भी तरह की जटिलता को संभालने के लिए जरूरी इंतजाम होने चाहिए।
दिशा निर्देशों के अनुसार, कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिसमें टिश्यू निकालने के लिए या टिश्यू लगाने के लिए स्कैल्प (सिर की त्वचा) या शरीर पर चीरा लगाया जाता है, वह सर्जरी की श्रेणी में आती है। इसमें चाहे पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल हो या रोबोटिक सिस्टम का, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
यह दस्तावेज कोच्चि में सामने आई हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़ी एक जटिलता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां एक मरीज को इस प्रक्रिया के बाद गंभीर संक्रमण हो गया था। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि ये दिशा निर्देश विशेष रूप से केरल की इसी घटना के जवाब में जारी की गई हैं।
एनएमसी ने यह निर्धारित किया है कि बाल प्रत्यारोपण सर्जरी करने वाले डॉक्टरों के पास पर्याप्त शिक्षा, विशेष प्रशिक्षण और वर्तमान नैदानिक दक्षता होनी चाहिए। उन्हें बालों की शारीरिक क्रिया विज्ञान, खोपड़ी की संरचना, बालों के झड़ने के विभिन्न प्रकार, रोगी का चयन, मतभेद, शल्य चिकित्सा तकनीक और जटिलताओं के प्रबंधन की अच्छी समझ होनी चाहिए।
आयोग ने कहा है कि बाल प्रत्यारोपण अधिमानतः औपचारिक शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों द्वारा किया जाना चाहिए, विशेष रूप से प्लास्टिक सर्जरी में एमसीएच/डीएनबी या त्वचाविज्ञान में एमडी/डीएनबी योग्यता प्राप्त डॉक्टरों द्वारा, जिन्हें त्वचा संबंधी शल्य प्रक्रियाओं का पर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त हो।
दिशानिर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्व-ऑपरेशन मूल्यांकन, शल्य चिकित्सा योजना, दाता बालों का संग्रहण, हेयरलाइन डिजाइन, प्राप्तकर्ता साइटों का निर्माण और ऑपरेशन के बाद की देखभाल योग्य पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों (आरएमपी) द्वारा की जानी चाहिए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्यशालाओं में भाग लेना या यूट्यूब और इसी तरह के प्लेटफार्मों पर वीडियो देखना, बाल प्रत्यारोपण सहित सौंदर्य शल्य चिकित्सा शुरू करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं है। इसने असाधारण परिस्थितियों के बहाने अप्रशिक्षित व्यक्तियों को ऐसी प्रक्रियाएं करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
सहायक और ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों के पास चिकित्सा पृष्ठभूमि होनी चाहिए और उन्हें शल्य चिकित्सा सहायता, कीटाणुशोधन, नसबंदी और रोगी संचार में संरचित प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए। उन्हें एक आरएमपी (आरएमपी) की देखरेख में काम करना होगा। रोगी सुरक्षा पर जोर देते हुए दिशानिर्देशों में उचित रूप से सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर, प्रशिक्षित कर्मियों, सख्त संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल, उपकरणों की उचित रोगाणुमुक्ति और उचित जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता बताई गई है।
केश प्रत्यारोपण करने वाले केंद्रों में एनेस्थीसिया सहायता, आपातकालीन दवाएं और पुनर्जीवन उपकरण, जिसमें क्रैश कार्ट भी शामिल है, उपलब्ध होने चाहिए। डॉक्टरों को ऑपरेशन से पहले उचित चिकित्सा मंजूरी सुनिश्चित करनी चाहिए और ऑपरेशन के बाद निगरानी और रिकवरी के लिए सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।
डे-केयर सर्जरी करने वाले क्लीनिकों को आपात स्थिति से निपटने के लिए गहन देखभाल और जटिल उपचार (देखभाल) सुविधाओं वाले पास के अस्पताल तक विश्वसनीय पहुंच होनी चाहिए। ऑपरेशन से पहले और बाद की तस्वीरों और जटिलताओं के दस्तावेजीकरण सहित उचित रोगी रिकॉर्ड बनाए रखना आवश्यक है।
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