रांची , अक्टूबर 23 -- झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर किसी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
जामताड़ा के गरीब, ग्रामीण और साधारण परिवारों के बच्चे भी विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करें, बड़े सपने देखें और देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहराएं-यही उनकी सोच है।
जामताड़ा जिले में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, सशक्त और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर जिले के दो हाई स्कूलों को प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित करने के साथ-साथ दोनों विद्यालयों में पांच-पांच अतिरिक्त डिजिटल क्लासरूम उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इस प्रकार दोनों विद्यालयों में कुल 10 आधुनिक डिजिटल क्लासरूम की सौगात मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ना, उनकी पढ़ाई को तकनीक आधारित बनाना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
दो विद्यालयों को प्लस टू का दर्जा, 10 आधुनिक डिजिटल क्लासरूम की पहल की गयी है। इस शैक्षणिक पहल के तहत शामिल विद्यालय हैं- सबनपुर हाई स्कूल - प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित और गोकुला हाई स्कूल - प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित है।
दोनों विद्यालयों में पांच-पांच अतिरिक्त डिजिटल क्लासरूम की व्यवस्था से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। यह पहल केवल कक्षाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है।
मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा, "शिक्षा को लेकर मैं शुरू से ही गंभीर रहा हूं, जिसका परिणाम है कि मैंने पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत करने के लिए बड़े-बड़े कदम उठाए हैं। आपने देखा होगा कि पूर्व में मैंने नारायणपुर जैसे छोटे प्रखंड में डिग्री कॉलेज देने का काम किया, ताकि हमारे बच्चों को पढ़ाई के लिए बंगाल या धनबाद नहीं जाना पड़े और उन्हें यहीं पर बेहतर शिक्षा मिल सके।
साथ ही, बगरुडीह में महिला डिग्री कॉलेज भी देने का काम किया। इसके अलावा जामताड़ा जैसे छोटे जिले में मेडिकल कॉलेज देने का काम किया, जिसके बारे में लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था। इसका मतलब साफ है कि मैं शिक्षा को लेकर गंभीर हूं। यही कारण है कि मैं सभी स्कूलों में अतिरिक्त डिजिटल और हाईटेक क्लासरूम देने का काम कर रहा हूं, ताकि हमारे बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।"*मंत्री डॉ अंसारी ने शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारे गरीब बच्चे भी ऑक्सफोर्ड में पढ़ें, यही मेरी सोच है। भाजपा के बच्चे सिर्फ ऑक्सफोर्ड में पढ़ें, यह मुझे कतई मंजूर नहीं। हमारे गरीब बच्चे भी पढ़ें। उनको पढ़ने-लिखने और समाज में आगे लाने के लिए मैं हर संभव मदद करने के लिए तैयार रहता हूं। हमारे बच्चे पढ़े-लिखे हों और समाज में आगे आएं, यही मेरी सोच है।
आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि जामताड़ा को मैं इंजीनियरिंग कॉलेज भी देने जा रहा हूं। हमारे बच्चों को कहीं भी नहीं जाना पड़ेगा। अच्छी, बेहतर और क्वालिटी एजुकेशन जामताड़ा में ही मिलेगी। आने वाले दिनों में मेरी सोच है कि पूरी व्यवस्था को एआई तकनीक पर सुचारू ढंग से चलाया जाए, ताकि हमारे बच्चे भी हाईटेक और अपडेटेड रहें।
मंत्री के अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देना है। आर्थिक स्थिति किसी भी विद्यार्थी के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। आधुनिक तकनीक, बेहतर शैक्षणिक संस्थान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से जामताड़ा के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है।
मंत्री डॉ. अंसारी ने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए कहा, *"पढ़ाई से बड़ी कोई ताकत नहीं। बच्चे कलम उठाओ, गमछा और तलवार नहीं। भाजपा वाले बच्चों के हाथ में तलवार और गमछा देना चाहते हैं, लेकिन मैं उनके हाथ में कलम और कॉपी देना चाहता हूं। इसी कड़ी में मैं लगातार विद्यालय दे रहा हूं, ताकि हमारे बच्चे पढ़े-लिखे और मजबूत बनें।"उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में कलम और कॉपी देकर उन्हें शिक्षा, ज्ञान और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाना जरूरी है। शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे बच्चे अपने परिवार, समाज और क्षेत्र का भविष्य बदल सकते हैं। उनका प्रयास है कि जामताड़ा का हर बच्चा पढ़े, आगे बढ़े और अपने सपनों को साकार करे।
मंत्री ने सबनपुर और गोकुला हाई स्कूलों को प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित करने के संबंध में कहा, "पूर्व में मैंने सबनपुर को प्लस टू का दर्जा दिलाया, ताकि हमारे बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़े। ठीक उसके बाद गोकुला हाई स्कूल को भी प्लस टू का दर्जा दिलाया। बच्चों की समुचित शिक्षा व्यवस्था की जगह व्यवस्था करने की दिशा में मैंने यह कदम उठाया। सरकारी विद्यालयों से ही बच्चे आईएएस और आईपीएस बनकर निकलते हैं। इसलिए मैं सरकारी व्यवस्था को और बेहतर कर रहा हूं।"उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों को मजबूत करना समय की जरूरत है। यदि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, आधुनिक क्लासरूम और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई उपलब्ध हो, तो उन्हें आगे बढ़ने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिल सकेगा।
दो हाई स्कूलों को प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित करने और दोनों विद्यालयों में पांच-पांच अतिरिक्त डिजिटल क्लासरूम की पहल को जामताड़ा की शिक्षा व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही नारायणपुर में डिग्री कॉलेज, बगरुडीह में महिला डिग्री कॉलेज और जामताड़ा में मेडिकल कॉलेज का उल्लेख करते हुए मंत्री ने क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने के अपने प्रयासों को रेखांकित किया।
आने वाले दिनों में इंजीनियरिंग कॉलेज की दिशा में पहल करने और शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के उपयोग की उनकी सोच का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। मंत्री की परिकल्पना है कि जामताड़ा के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने जिले से बाहर जाने की मजबूरी कम हो और वे अपने ही क्षेत्र में रहकर बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त कर सकें।
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