नयी दिल्ली , मार्च 03 -- ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध केवल दोनों पक्षों के बीच बमबारी और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न होकर वैश्विक बाजार को प्रभावित करने का संकेत देने लगा है। इस घटना को लेकर वैश्विक समुदाय चिंतित है और इस चिंता के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग है।
इस जलमार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है और ईरान के इसे बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक बाजार में बेचैनी पैदा कर दी है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं और विश्लेषकों का मानना है कि यदि युद्ध लंबे समय तक खींचता है तो यह 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यदि स्थिति और भयावह होती है तो यह 120 से 150 डॉलर तक भी पहुंच सकता है।
इस क्षेत्र से गुजरने वाले टैंकरों के लिए बीमा देने वाली कंपनियों ने पहले बीमा को रद्द करना शुरू कर दिया है। बीमा प्रीमियम बढ़ने लगा है और जोखिम बढ़ने के साथ ही परिवहन लागत बढ़ने लगी है, जो अंतत: उर्जा आपूर्ति की कीमत बढ़ोत्तरी में दिखने लगा है।
खाड़ी देशों का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और आगे ओमान की खाड़ी के रास्ते अरब सागर को जोड़ता है। इसलिए यह एशिया के साथ वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण नाका है। यहाँ से हर रोज लगभग दो अरब बैरल तेल का परिवहन होता है।
इसका महत्व यह है कि महत्वपूर्ण तेल उत्पादक और आपूर्तिकर्ता देशों (ओपेक देशों) के लिए यह जीवन रेखा की तरह है। कतर, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत आदि देश इसी रास्ते से अपने तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात करते हैं। इन खाड़ी देशों से आयातित उर्जा पर ही एशिया की 90 प्रतिशत उर्जा आपूर्ति निर्भर करती है। जापान और कोरिया जैसे देश इन्हीं देशों से आयातित तेल और प्राकृतिक गैस पर मुख्य रूप से निर्भर है।
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