तिरुवनंतपुरम , जुलाई 01 -- केरल विधानसभा ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2026 और संबंधित नियमों में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने का आग्रह किया।

इस प्रस्ताव का भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) को छोड़कर सभी दलों ने समर्थन किया।

प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से केंद्र सरकार की शक्तियों का बहुत विस्तार होगा जिसमें उन संगठनों की संपत्तियों एवं प्रबंधन को अपने हाथ में लेने की शक्तियां भी शामिल है जिनके एफसीआरए पंजीकरण रद्द या वापस कर दिए गए हैं या जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे प्रावधान पूरे देश में गैर-सरकारी संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों, धर्मार्थ संस्थानों और अन्य नागरिक समाज निकायों की स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून मानवीय राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक कल्याण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण एवं मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेंगे जिससे जनता की सेवा करने की उनकी क्षमता कमजोर हो जायेगी। उन्होंने कहा कि ये संशोधन विदेशी चंदे की प्राप्ति एवं उपयोग पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाते हैं और धर्मार्थ, शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थानों के कामकाज में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।

श्री सतीशन ने आगे तर्क दिया कि प्रस्तावित परिवर्तन संघवाद, लोकतंत्र एवं नागरिकों के संघ बनाने एवं स्वैच्छिक सार्वजनिक सेवा करने के संवैधानिक अधिकार के सिद्धांतों के विपरीत हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से हितधारकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं नागरिक समाज समूहों के साथ व्यापक परामर्श करने के बाद इस कानून पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए चिंता व्यक्त की कि प्रस्तावित संशोधन स्वैच्छिक संगठनों पर अभूतपूर्व नियंत्रण लगाएंगे और सार्वजनिक कल्याण एवं सामुदायिक विकास में शामिल संस्थानों को कमजोर करेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून राहत कार्य, शैक्षिक पहल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य धर्मार्थ गतिविधियों में लगे हजारों संगठनों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।

भाजपा ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अंशदान की प्राप्ति एवं उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नियामक निरीक्षण को मजबूत करना है। भाजपा विधायकों ने तर्क दिया कि विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने एवं राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कड़े प्रावधान आवश्यक हैं।

विधानसभा में बहस के दौरान भाजपा नेता वी. मुरलीधरन ने तर्क दिया कि संसद द्वारा पारित कानून में संशोधन करने का अधिकार राज्य विधानसभा को नहीं है। बहस के बाद विधानसभा ने बहुमत से प्रस्ताव पारित हुआ जिसमें केंद्र सरकार से प्रस्तावित एफसीआरए संशोधनों को वापस लेने और गैर सरकारी संगठनों, धर्मार्थ संस्थानों एवं नागरिक समाज संगठनों की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और प्रभावी कामकाज की रक्षा करने का आह्वान किया गया।

प्रस्ताव के पक्ष में 111 सदस्यों ने मतदान किया जबकि दो भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया।

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