अलप्पुझा , अप्रैल 04 -- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला किया तथा उन पर अहंकार, राजनीतिक सुविधा एवं चुनिंदा चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
श्री गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन या उनके परिवार को कभी सार्वजनिक रूप से निशाना क्यों नहीं बनाया जबकि वह लगातार उन पर और कांग्रेस पर हमले करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह "चुप्पी" भाजपा और एलडीएफ के कुछ वर्गों के बीच एक गुप्त समझौते का संकेत देती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि एलडीएफ ने अपना वैचारिक स्वरूप खो दिया है और अब इसे सच्चा वामपंथी आंदोलन नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अब इस मोर्चे में दो प्रकार के नेता हैं, एक वे जो आरएसएस और भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं और दूसरे वे जो अब भी वामपंथी विचारधारा में विश्वास रखते हैं लेकिन पार्टी के भीतर हाशिए पर चले गए हैं।
श्री गांधी ने कहा कि ऐसे वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध नेताओं को उनके ही दल में धोखा मिला है। अपनी आलोचना को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने श्री मोदी पर केरल के संवेदनशील मुद्दों, विशेष रूप से सबरीमाला स्वर्ण विवाद से जानबूझकर चुप रहने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अन्य जगहों के मंदिरों के बारे में अक्सर बोलते हैं, लेकिन सबरीमाला में सोने की जगह तांबा लगाए जाने के आरोपों पर चुप रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुप्पी मुख्यमंत्री और एलडीएफ को बचाने के लिए है। उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे राजनीतिक हमलों में असमानता पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्हें कई मामलों, संसद से अयोग्य घोषित किए जाने और उनके आधिकारिक आवास से बेदखल किए जाने का सामना करना पड़ रहा है जबकि केरल के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री की इसी तरह की आलोचनाओं से अछूते रहे हैं।
श्री गांधी ने व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए श्री मोदी और श्री विजयन दोनों पर सत्ता के नशे में चूर होने और खुद को जनता से ऊपर समझने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केरल में काले झंडे लहराने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा की जाती है क्योंकि असहमति को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति नहीं बल्कि खतरा माना जाता है।
कांग्रेस नेता ने राज्य में शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की और कृषि संकट, बढ़ते मादक पदार्थों के सेवन और ईसाइयों सहित अल्पसंख्यकों पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मामलों पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करते हुए वैश्विक नेतृत्व एवं नीतिगत निर्णयों के प्रति उनके दृष्टिकोण पर सवाल खड़ा किया।
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