तिरुवनंतपुरम , मार्च 12 -- केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पी.सी. विष्णुनाथ (विधायक), पूर्व मंत्री मुल्लाक्करा रत्नाकरण और वरिष्ठ पत्रकार राधाकृष्णन एम.जी. ने राज्य में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते पारिस्थितिकी क्षरण पर गंभीर चिंता व्यक्त हुए कहा है कि विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय अध्ययन एक अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।
ये तिरुवनंतपुरम प्रेस क्लब में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे, जहाँ 'केरल पारिस्थितिकी ऐक्य वेदी' द्वारा तैयार 'जन-पर्यावरण नीति दस्तावेज' जारी किया गया।
इस अवसर पर श्री विष्णुनाथ ने कहा कि विभिन्न अध्ययन संकेत देते हैं कि केरल तेजी से एक अत्यंत नाजुक पारिस्थितिक क्षेत्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने बार-बार बड़े पैमाने पर बाढ़ और लगातार भूस्खलन देखे हैं और यह धीरे-धीरे चक्रवात संभावित क्षेत्र में बदल रहा है।
उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि कुट्टनाड जैसे क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय प्रभावों का सामना कर रहे हैं, जिससे कई निवासियों को अन्य क्षेत्रों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि विकास परियोजनाओं के लिए पूरे राज्य में एक समान निर्माण मॉडल का पालन नहीं करना चाहिए। उन्होंने उत्तर में कासरगोड से लेकर दक्षिण में तिरुवनंतपुरम तक एक ही दृष्टिकोण अपनाने के खिलाफ चेतावनी दी।
श्री विष्णुनाथ ने कहा कि हर विकास परियोजना संबंधित क्षेत्र के स्थानीय भूगोल और पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण नीति दस्तावेज में शामिल सिफारिशों को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के सामने पेश किया जाएगा।
श्री रत्नाकरण ने कहा कि पर्यावरण नीति दस्तावेज को जनता द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार और समर्थित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि जब बीते वर्षों में केरल की पूर्वी पहाड़ियों से भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर ट्रकों में भरकर ले जाए जा रहे थे, तब जनता में बहुत कम चिंता थी। हालांकि, जब कर्नाटक में मिट्टी ले जा रहे एक ट्रक को रोका गया, तो केरल में इसकी व्यापक प्रतिक्रिया हुई और मीडिया का ध्यान इस ओर गया।
श्री रत्नाकरण ने यह भी बताया कि पिछली पीढ़ियों ने धान के खेतों को बचाने पर शायद ही कभी चर्चा की थी, लेकिन तेजी से होते विकास के साथ राज्य भर में कई धान के खेत धीरे-धीरे गायब हो गए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अब विकास को केवल गति और बुनियादी ढांचे के विस्तार से जोड़कर देखते हैं।
श्री राधाकृष्णन ने नीति दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि समाज को इस बात की गंभीरता से जांच करनी चाहिए कि क्या बड़े पैमाने की विकास परियोजनाएं केरल में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में राज्य में सबसे अधिक विकास परियोजनाएं देखी गईं, जबकि 2017 के बाद से बार-बार प्राकृतिक आपदाएं आनी शुरू हुईं।
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