मलप्पुरम , मई 11 -- केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) द्वारा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा होने के तुरंत बाद अपने वरिष्ठ नेताओं को पनक्कड़ में इकट्ठा होने का निर्देश दिया ।

आईयूएमएल का यह निर्देश तब आया है जब गठबंधन की चुनावी जीत के बाद अगले मुख्यमंत्री के चयन एवं यूडीएफ घटकों के बीच कैबिनेट विभागों के बंटवारे पर कांग्रेस आलाकमान का नयी दिल्ली में गहन विचार-विमर्श जारी है।

राजनीतिक पर्यवेक्षक लीग के इस कदम को एक स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं कि पार्टी महत्वपूर्ण सत्ता-साझाकरण चर्चा की तैयारी कर रही है और नेतृत्व का प्रश्न सुलझने के तुरंत बाद कैबिनेट प्रतिनिधित्व पर अपनी स्थिति को अंतिम रूप देना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि केरल में नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा तो आईयूएमएल नेतृत्व ने मलप्पुरम में पार्टी मुख्यालय एवं प्रमुख निर्णय लेने वाले केंद्र पनक्कड़ में परामर्श करने की योजना बनाई हैआने वाली सरकार में मंत्री पद का आवंटन और अन्य संवैधानिक पदों पर चर्चा में वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम लीग ने सार्वजनिक रूप से संभावित यूडीएफ सरकार में छह कैबिनेट सीट की मांग की थी। पार्टी ने उपमुख्यमंत्री और विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर भी दावा किया था।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आईयूएमएल नेतृत्व अपनी मांगों पर कायम है और चुनावों के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बावजूद अपने दावों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच, यूडीएफ में चर्चा मुख्यमंत्री पद पर केंद्रित है जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन इस पद के लिए प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।

राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि मुस्लिम लीग की वर्तमान स्थिति उस समय कांग्रेस नेतृत्व के कुछ वर्गों के साथ हुई प्रारंभिक समझौतों के साथ मजबूती से जुड़ी हुई है, जिनमें यह तय किया गया था कि अगर यूडीएफ सत्ता में आती है तो सत्ता साझा की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, आईयूएमएल के प्रदेश अध्यक्ष पनक्कड़ सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर को वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी की स्थिति से अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

सूत्रों ने संकेत दिया है कि आईयूएमएल को डर है कि अपेक्षित नेतृत्व समीकरण में बदलाव से पार्टी को कैबिनेट विभागों एवं सरकार में प्रभावशाली पदों के अपने दावों पर फिर से बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।आईयूएमएल के कुछ वर्गों में यह भी धारणा है कि चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पार्टी को दिया गया महत्व यूडीएफ की जीत एवं सरकार बनने के बाद कम हो सकता है।

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