तिरुवनंतपुरम , मई 11 -- कांग्रेस आलाकमान ने केरल के अगले मुख्यमंत्री को लेकर विचार-विमर्श तेज़ कर दिया है और पार्टी के भीतर जारी अनिश्चितता एवं गुटबाज़ी की बढ़ती चुनौतियों के बीच, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने पार्टी की केरल इकाई के पूर्व अध्यक्षों तथा संगठन के अहम नेताओं को दिल्ली तलब किया है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि आलाकमान अंतिम फैसले पर पहुँचने से पहले केरल के तर्जुबेकार नेताओं और गठबंधन के सहयोगियों के साथ बातचीत का एक और दौर पूरा करना चाहता है।
राज्य के मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान में हो रही देरी का ताल्लुक उस चुनौती से जोड़ा जा रहा है, जिसे इस पद के तीन अहम दावेदारों के पेश किया है। इनमें कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल, राज्य में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला के लिए कोई ऐसा फ़ॉर्मूला तलाशना है जो सभी को मंजूर भी हो। कहा जा रहा है कि तीनों खेमे ज़ोरदार लॉबिंग जारी रखे हुए हैं, और उन्हें पूरा भरोसा है कि आखिरकार उनके अपने नेता को ही यह पद मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व इस बात पर बंटा हुआ है कि मुख्यमंत्री का चयन विधायकों के विधायी समर्थन के आधार पर हो , या फिर पूरे राज्य में व्यापक जन अपील और राजनीतिक स्वीकार्यता के आधार पर। इस अहम सवाल पर साफगोई की कमी को ही फैसले को अमली जामा पहनाने में हो रही देरी का एक खास वजह माना जा रहा है।
इसी उठापटक में, श्री गांधी ने कथित तौर पर केरल कांग्रेस के कई पुराने नेताओं को विचार-विमर्श के लिए तत्काल दिल्ली पहुँचने को कहा है। इन पूर्व अध्यक्षों के. सुधाकरन, के. मुरलीधरन, वी. एम. सुधीरन और मुल्लापल्ली रामचंद्रन के साथ-साथ वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन को भी राष्ट्रीय राजधानी आकर नेतृत्व के साथ अपने विचार साझा करने को कहा गया है।
हालांकि अधिकांश नेताओं के आज ही दिल्ली के लिए रवाना होने की उम्मीद है, लेकिन यह जानकारी भी सामने आयी है कि श्री रामचंद्रन ने नेतृत्व को सूचित किया है कि वे फ़ोन पर ही अपना पक्ष रख सकते हैं। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षों शफ़ी परम्बिल, पी. सी. विष्णुनाथ और ए. पी. अनिल कुमार को भी दिल्ली पहुँचने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार श्री गांधी ने नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के साथ पहले ही चर्चा कर ली है। औपचारिक ऐलान होने से पहले, उनकी कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सहयोगियों से बातचीत करने की भी उम्मीद है। इस बीच, यह बात भी निकल कर आयी है कि दो दावेदारों को बारी बारी से कमान संभालने का मौका दिया जाए। सियासी हल्कों में ऐसे किसी फॉर्मूले को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं, लेकिन माना जा रहा है कि न तो श्री सतीशन और न ही श्री चेन्निथला को इस बावत आलाकमान से कोई स्पष्ट इशारा मिला है। सूत्रों ने सत्ता संघर्ष के दौरान प्रतिद्वंद्वी खेमों के बीच बढ़ते तनाव की ओर भी इशारा किया है।
श्री सतीशन इस समय कोच्चि में हैं और श्री चेन्निथला तिरुवनंतपुरम में हैं। उन्होंने कथित तौर पर चर्चाओं के इस ताज़ा दौर में अभी तक फोन पर सीधे बातचीत नहीं की है।
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