तिरुवनंतपुरम , नवंबर 03 -- केरल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) से त्रावणकोर-कोचीन हिंदू धार्मिक संस्थान अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत 2017 से आगे की अवधि के लिए तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट की प्रतियों की मांग की है।
टीडीबी के सचिव को संबोधित पत्र में श्री चंद्रशेखर ने बोर्ड के अपने नियंत्रणाधीन मंदिरों से संबंधित सभी प्राप्तियों और व्ययों का लेखा-जोखा रखने और उनका ऑडिट करने के कानूनी दायित्व पर ज़ोर दिया है। उन्हाेंने पत्र में विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2017-2018 से 2024-2025 तक की ऑडिट रिपोर्ट की मांग की है। पत्र की एक प्रति उच्च न्यायालय के महापंजीयक को भी सौंपी गई है।
श्री चंद्रशेखर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 1950 के अधिनियम की धारा 32 के तहत बोर्ड को सभी वित्तीय लेन-देन का नियमित लेखा-जोखा रखना होगा, जिसका केरल उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षकों द्वारा प्रतिवर्ष लेखा-परीक्षण किया जाना है। इस प्रावधान में यह भी नियम है कि लेखा परीक्षक को उच्च न्यायालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी जिसमें किसी भी अनियमित, अवैध या अनुचित व्यय, वित्तीय हानि, अपव्यय या लापरवाही या कदाचार के कारण हुए कुप्रबंधन का विवरण हो। ऐसी रिपोर्टों की प्रतियां उच्च न्यायालय द्वारा आवश्यक कार्रवाई और किसी भी चूक के सुधार के लिए बोर्ड को भेजी जानी चाहिए।
लेखा-परीक्षा प्रक्रिया और अनुवर्ती कार्रवाइयों पर उच्च न्यायालय की पर्यवेक्षी भूमिका को दोहराते हुए, भाजपा नेता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मंदिर की संपत्ति और परिसंपत्तियों के प्रबंधन में सार्वजनिक जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनमें से अधिकांश का वित्तपोषण भक्तों के चढ़ावे से होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी लेखा-परीक्षा रिपोर्टों को सुलभ बनाने से पारदर्शिता बनी रहेगी और भक्तों और जनता को मंदिर के वित्त के उचित प्रशासन के बारे में आश्वस्त किया जा सकेगा।
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