तिरुवनंतपुरम , सितंबर 16 -- ऊर्जा क्षेत्र विशेषज्ञ के एस मनोज ने कहा है कि केरल के नवीनतम ऊर्जा संकट को ऊर्जा मांग और आपूर्ति में असंतुलन की स्थिति के बजाय एक नीतिगत चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।
स्मार्ट ग्रिड एंड पावर सिस्टम ऑटोमेशन के लेखक श्री मनोज ने कहा कि 700 से 900 मेगावाट की कथित बिजली कमी और कमी जारी रहने पर एनटीपीसी से महंगी बिजली खरीदने की संभावना के कारण केरल राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (केएसईबीएल) पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को लेकर चिंता है।
उन्होंने कहा, "मुद्दा केवल अतिरिक्त बिजली खरीदने का नहीं है। सवाल यह है कि इसे किस कीमत पर खरीदा जाएगा और इसका वित्तीय असर क्या होगा।"उन्होंने बताया कि लगातार 300 मेगावाट बिजली 30 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदने पर अन्य लागू शुल्कों को छोड़कर प्रतिदिन करीब 2.16 करोड़ रुपये और 30 दिनों में करीब 65 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वास्तविक वित्तीय असर खरीदी जाने वाली बिजली की मात्रा, अवधि और अनुबंध की शर्तों पर निर्भर करेगा।
श्री मनोज ने कहा कि केएसईबीएल को बिजली प्रणाली प्रबंधन में मजबूत विशेषज्ञता रखने वाले पूर्णकालिक अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक की जरूरत है। उन्होंने बिजली क्षेत्र के तकनीकी और आर्थिक दोनों पहलुओं से निपटने में सक्षम पेशेवर नेतृत्व की मांग की।
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