तिरुवनंतपुरम , जून 05 -- केरल पुलिस राज्य में नशीले पदार्थो की तस्करी को रोकने के लिए 'ऑपरेशन थंडर' के तहत डिजिटल निगरानी प्रणाली बना रही है। इसमें मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप चैटबॉट शामिल हैं, ताकि आम लोग बिना अपनी पहचान बताए जानकारी दे सकें।
यह अभियान पांच राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और सीमा शुल्क विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी।
इसके अलावा राज्यों के बीच नशीले पदार्थो की तस्करी को रोकने के लिए दूसरे राज्यों की उन प्रयोगशालाओं की भी जांच की जाएगी जहां सिंथेटिक ड्रग्स बनाए जाते हैं। ऐसे पदार्थों के उत्पादन, भंडारण और वितरण में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें पकड़ा जाएगा।
केरल पुलिस का 'ऑपरेशन थंडर' के ज़रिए मकसद ड्रग माफियाओं के खिलाफ़ कड़ी कानूनी कार्रवाई करना और लोगों की सक्रिय भागीदारी से ड्रग्स के दुरुपयोग के खिलाफ़ एक जन-आंदोलन खड़ा करना है।
नशीले पदार्थो की तस्करी को रोकने की कोशिशों को मज़बूत करने के लिए राज्य के सभी 84 पुलिस सब-डिविजन में चार-चार विशेष दस्ते तैनात किए गए हैं।
'ऑपरेशन थंडर: द नार्को हंट' दो जून को केरल में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य को ड्रग-मुक्त बनाना और नशीले पदार्थों की तस्करी के स्रोतों की पहचान करके उन्हें रोकना है।
इस अभियान के तहत राज्य भर में एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें नशीले पदार्थो की तस्करी और बिक्री के संदेह वाले लोगों की सघन जांच और उन पर कानूनी कार्रवाई की गई।
अभियान के दौरान अलग-अलग प्रतिबंधित नशीले पदार्थ रखने के आरोप में कुल 340 मामले दर्ज किए गए और 368 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान ज़ब्त की गई चीज़ों में 0.549 किलोग्राम एमडीएमए , 16.7931 किलोग्राम गांजा, 0.461 किलोग्राम हशीश ऑयल और 220 भांग की बीड़ी शामिल हैं।
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