तिरुवनंतपुरम , फरवरी 13 -- केरल की कैबिनेट ने शहरी नीति मसौदा को मंजूरी दे दी है, जिससे यह देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अगले 25 वर्षों के लिए दीर्घकालिक विकास रोडमैप तय करने वाली व्यापक योजना को औपचारिक रूप से अपनाया है।
शहरी नीति को स्थानीय स्वशासन विभाग ने तैयार किया था और शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई। राज्य के तेजी से फैलते शहरी परिदृश्य को सुव्यवस्थित और सतत तरीके से दिशा देने के उद्देश्य से यह नीति तैयार की गई है। यह कदम वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में समर्पित शहरी ढांचा तैयार करने की घोषणा के बाद उठाया गया।
दिसंबर 2023 में राज्य सरकार ने केरल अर्बन पॉलिसी कमीशन का गठन किया, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया। कमीशन ने मार्च 2025 में 'नवकेरल अर्बन पॉलिसी रिपोर्ट' मुख्यमंत्री को सौंपी। इसके बाद सितंबर 2025 में कोच्चि में एक वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के मंत्री, मेयर, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञों ने शहरीकरण के भविष्य पर विस्तृत चर्चा की। विचार-विमर्श से प्राप्त सुझावों और सिफारिशों को शामिल करते हुए अंतिम नीति को तैयार किया गया है।
कमीशन के अनुमान के अनुसार 2050 तक केरल लगभग 80 प्रतिशत शहरीकृत हो जाएगा। राज्य में पर्वतीय और तटीय क्षेत्रों के बीच घनी आबादी वाले गलियारों में विकेंद्रीकृत शहरी विस्तार देखा जा रहा है। तेजी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास के दबाव को देखते हुए, यह नई नीति शहरी विस्तार को विनियमित और मार्गदर्शित करने के लिए एक वैज्ञानिक संदर्भ दस्तावेज के रूप में कार्य करेगी। यह नीति शहरीकरण को राज्य में आर्थिक विकास और उत्पादकता का प्रमुख चालक बनाने की रणनीतिक रूपरेखा भी प्रस्तुत करती है।
केरल की विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था और सहभागी योजना परंपरा को आधार बनाते हुए, यह नीति 2050 तक जलवायु-स्मार्ट शहरों और कस्बों का एक सतत नेटवर्क विकसित करने की परिकल्पना करती है। ढांचे में वैज्ञानिक योजना, सुशासन और समावेशी विकास पर जोर दिया गया है, ताकि शहरीकरण से उत्पन्न लाभ-जैसे उच्च गुणवत्ता वाली नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा-समान रूप से वितरित किए जा सकें। साथ ही सामाजिक और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने तथा सामाजिक सुरक्षा और सहायता प्रणालियों को मजबूत करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
कैबिनेट ने केरल ग्राफीन नीति को भी मंजूरी दी, जिससे राज्य ग्राफीन उत्पादन, अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा। ग्राफीन को उसकी असाधारण मजबूती, चालकता और बहुउपयोगिता के कारण भविष्य की "चमत्कारी सामग्री" माना जाता है, जो कई औद्योगिक क्षेत्रों में परिवर्तन ला सकती है। इस नीति के माध्यम से सरकार राज्य में ग्राफीन और संबंधित उन्नत सामग्रियों के अनुसंधान, नवाचार और बड़े पैमाने पर उपयोग को प्रोत्साहित करेगी।
कैबिनेट ने केरल अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम, 1980 में संशोधन किए गए हैं। संशोधन के तहत वकालत छोड़ने पर देय अधिकतम लाभ तथा मृत्यु की स्थिति में देय राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, बड़ी सर्जरी और कैंसर उपचार के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे अधिवक्ताओं के कल्याण को और सुदृढ़ किया गया है।
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