तिरुवनंतपुरम , जून 02 -- केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने घोषणा की है कि राज्य सरकार ने डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से अगले तीन वर्षों की अवधि में दैनिक दूध उत्पादन बढ़ाकर एक करोड़ लीटर करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
मुख्यमंत्री ने यहां जवाहर सहकारी भवन में राज्य स्तरीय विश्व दुग्ध दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा, "केरल में वर्तमान में 86 लाख लीटर की दैनिक आवश्यकता के मुकाबले प्रतिदिन लगभग 70 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ, सरकार मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों के निर्माण में लगे उद्यमों को पूरा सहयोग देगी।"मुख्यमंत्री ने कहा कि डेयरी किसानों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पशु चारे की बढ़ती कीमत को दूर करने के लिए सरकार मजबूती से हस्तक्षेप करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि चारा निर्माताओं को दूध की कीमतों में होने वाली वृद्धि का फायदा उठाकर मनमाने ढंग से चारे के दाम बढ़ाने और इस तरह किसानों पर बोझ डालने की अनुमति नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डेयरी किसानों, सहकारी समितियों और सभी हितधारकों का समर्थन और सहयोग आवश्यक होगा।
किसानों की सहायता के उपायों के हिस्से के रूप में श्री सतीशन ने कहा कि ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों सहित स्थानीय स्वशासन संस्थानों को पशु चारे के लिए अनुदान योजनाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। वन्यजीवों के हमलों की बढ़ती घटनाओं के कारण कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पशुपालन कई किसान परिवारों के लिए राहत और आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है।
उन्होंने डेयरी फार्मिंग में लगी महिलाओं की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की भी सराहना की और महिला किसानों के लिए अधिक पहचान और समर्थन का आह्वान किया, जो विश्व दुग्ध दिवस पर संयुक्त राष्ट्र के प्रचारित संदेश को दर्शाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मिलावट का पता लगाने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनायेगी और कड़े गुणवत्ता निरीक्षण करेगी। उन्होंने दृढ़ता से कहा, "उपभोक्ताओं को आपूर्ति किये जाने वाले दूध की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।"मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आधे से भी कम डेयरी किसान वर्तमान में डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य हैं और उन्होंने इस क्षेत्र के व्यापक हित में राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए अधिक से अधिक किसानों को सहकारी नेटवर्क के दायरे में लाने के प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार लक्ष्य की दिशा में प्रगति का आकलन करने और समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए हर छह महीने में दूध उत्पादन के आंकड़ों की समीक्षा करेगी। उन्होंने आगे कहा कि इसका व्यापक उद्देश्य एक व्यापक डेयरी विकास कार्यक्रम लागू करना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर डेयरी किसानों को सभी आवश्यक सहायता की गारंटी दे और उन्हें सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम बनाये।
राज्य भर के डेयरी किसानों को विश्व दुग्ध दिवस की शुभकामनाएं देते हुए श्री सतीशन ने केरल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए डेयरी विकास मंत्री बिंदु कृष्णा ने कहा कि दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि हालांकि किसी समय केरल के अधिकतर घरों में गाय-भैंस और बकरी पालन आम बात थी, लेकिन शहरीकरण और भूमि की घटती उपलब्धता के कारण पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
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