तिरुवनंतपुरम , मई 24 -- साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला की उस व्यापक साइबर रणनीति की घोषणा का स्वागत किया है, जिसका उद्देश्य क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, लोन-ऐप घोटाले, ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और नागरिकों की डेटा गोपनीयता के खतरों से निपटना है।

विशेषज्ञों ने इस पहल को केरल के साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और राज्य में साइबर पुलिसिंग के आधुनिकीकरण की दिशा में एक समयोचित तथा महत्वपूर्ण कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केरल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों को अपनाने, संस्थानों को मजबूत करने, साइबर जांच क्षमताओं में सुधार करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर विश्व स्तरीय साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि गृह मंत्री की यह घोषणा इस बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है कि साइबर अपराध केरल में कानून प्रवर्तन के सामने सबसे तेजी से बढ़ती चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, डिजिटल लोन घोटाले, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, ऑनलाइन उत्पीड़न और डेटा गोपनीयता पर ध्यान केंद्रित करना यह दर्शाता है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गयी है, बल्कि यह शासन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चिंता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर अपराध स्वाभाविक रूप से सीमाहीन होता है, जिसमें रैनसमवेयर गिरोह, फिशिंग सिंडिकेट, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी नेटवर्क और साइबर जासूसी समूह समान तरीकों और तकनीकों का उपयोग कर कई देशों में काम करते हैं। अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए जिन आपराधिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें केरल के नागरिकों के खिलाफ भी अपनाया जा सकता है। इसलिए विशेषज्ञों ने जोर दिया कि केरल की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को वैश्विक मानकों और सर्वोत्तम विधियाें के अनुरूप परखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने पारंपरिक साइबर पुलिसिंग से आगे बढ़कर उन्नत साइबर जांच प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक साइबर अपराध जांच के लिए बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) टीमों की आवश्यकता होती है, जिसमें साइबर प्रशिक्षित पुलिस कर्मी, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ, मैलवेयर विश्लेषक, नेटवर्क सुरक्षा विशेषज्ञ, साइबर कानून विशेषज्ञ, अभियोजक और क्षेत्र-विशेष के डोमेन विशेषज्ञ शामिल हों।

विशेषज्ञों ने आगे यह भी सुझाव दिया कि प्रस्तावित साइबर रणनीति में गंभीर साइबर अपराध जांच के लिए समय-समय पर समीक्षा तंत्र शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को न केवल दर्ज मामलों की संख्या का, बल्कि जांच की समय-सीमा, लंबित मामलों की दर, दोषसिद्धि की दर, फॉरेंसिक क्षमताओं, जनशक्ति की कमी, तकनीकी अंतराल और संस्थागत तैयारियों का भी मूल्यांकन करना चाहिए। कई विशेषज्ञों ने निरंतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, साइबर खुफिया इकाइयों, सार्वजनिक जागरूकता अभियानों और विशेष साइबर अपराध अदालतों में निवेश किया जाता है तो केरल साइबर शासन में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित