तिरुवनंतपुरम , सितंबर 12 -- सीएमआरएल-एक्सालॉजिक रिश्वत मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एवं विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन को तत्काल राजनीतिक समर्थन देने से मना कर दिया है। इससे सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के भीतर मतभेद गहरा गये हैं और माकपा रक्षात्मक मुद्रा में आ गयी है।

भाकपा राज्य सचिवालय ने तय किया है कि आने वाले दिनों में मामले से जुड़ी जानकारियों, घटनाक्रमों और सरकार के रुख की समीक्षा के बाद ही इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जायेगी।

भाकपा का यह फैसला काफी मायने रखता है, क्योंकि माकपा का केंद्रीय और राज्य नेतृत्व श्री विजयन के समर्थन में उतर आया है और ईडी की ताजा कार्रवाई पर तीखा हमला बोल रहा है। ईडी ने कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) और वीणा की बंद हो चुकी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच वित्तीय लेन-देन के मामले में विजयन, उनकी बेटी टी वीणा और दामाद पी ए मोहम्मद रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

एलडीएफ के दूसरे सबसे बड़े घटक दल भाकपा ने श्री विजयन के बचाव में माकपा के अभियान से दूरी बना रखी है। पार्टी के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की स्पष्टता के बिना पार्टी तुरंत कोई राजनीतिक समर्थन नहीं दे सकती।

भाकपा हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग का विरोध करती रही है, लेकिन पार्टी के भीतर एक्सालॉजिक के लेन-देन को लेकर स्पष्टता न होने पर चिंता है। नेतृत्व का मानना है कि यदि कंपनी के कामकाज में कोई गड़बड़ी पायी जाती है तो श्रीमती वीणा को व्यक्तिगत रूप से उसके नतीजे भुगतने होंगे।

ईडी की जांच की आंच श्री विजयन तक पहुंचने से भाकपा का यह रुख और अहम हो गया है। एजेंसी का आरोप है कि सीएमआरएल ने बिना किसी सेवा के एक्सालॉजिक को भुगतान किया था, इसलिए उसने केरल पुलिस से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।

भाकपा का मानना है कि भले ही ईडी की कार्रवाई राजनीतिक से प्रेरित लगे, लेकिन बिना वित्तीय स्पष्टता के समर्थन देना नुकसानदेह हो सकता है। आरोपों में खुद को निर्दोष साबित करना संबंधित व्यक्तियों की ही जिम्मेदारी है। माकपा नेतृत्व ईडी की कार्रवाई पर साझा राजनीतिक रणनीति बनाने के लिए एलडीएफ की बैठक बुलाना चाहता है, लेकिन भाकपा के कड़े रुख से ऐसी बैठक में तीखी बहस होना तय है।

उप-विपक्ष के नेता के पद को लेकर चल रहा विवाद भी इस खींचतान को बढ़ा रहा है। यद्यपि श्री विजयन ने टकराव से बचने के लिए फिलहाल इस पद की घोषणा टाल दी है, लेकिन श्री विश्वम अपने रुख पर कायम हैं। भाकपा ने माकपा के एकतरफा फैसलों और गठबंधन धर्म के उल्लंघन के खिलाफ कड़ा रुख बनाये रखने का फैसला किया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि आगामी विधानसभा सत्र में या जनहित के मुद्दों पर माकपा का हर हाल में साथ देना जरूरी नहीं है।

भाकपा अपनी छवि को भ्रष्टाचार के आरोपों से बचाकर रखना चाहती है और उसका मानना है कि बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में सहयोगी दलों की सहमति जरूरी है। इन मतभेदों ने एलडीएफ के आंतरिक तनाव को उजागर कर दिया है, जिससे विभिन्न जनमुद्दों पर संयुक्त आंदोलन खड़ा करना गठबंधन के लिए मुश्किल हो रहा है।

भाकपा लगातार माकपा के 'बड़े भाई' वाले रवैये और गठबंधन में फैसले थोपने की नीति का विरोध कर रही है। इस बीच माकपा ने ईडी पर हमला तेज करते हुए उस पर जबरन झूठे बयान दर्ज करने और राजनीतिक विरोधियों को फंसाने का आरोप लगाया है।माकपा राज्य सचिव एम वी गोविंदन मास्टर ने आरोप लगाया कि ईडी लोगों को डरा-धमकाकर मामले दर्ज कर रही है।

उन्होंने कारोबारी हसन वारिस का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी बेटी को फंसाने की धमकी देकर बयान लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि बयान दर्ज करते समय सशस्त्र बलों से दबाव बनाया गया और अधिवक्ता से बात भी नहीं करने दी गयी।

श्री गोविंदन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले की तरह ही केरल में भी लोगों को डराकर सरकारी गवाह बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डायरियों में यूडीएफ नेताओं और पत्रकारों के नाम होने के बावजूद केवल वैध तरीके से लेन-देन करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।

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