अलाप्पुझा , मार्च 12 -- केरल की राजनीति में एक बड़ा प्रभाव डालने वाले घटनाक्रम में दिग्गज कम्युनिस्ट नेता और पूर्व मंत्री जी सुधाकरण ने गुरुवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) छोड़ने और अंबालाप्पुझा से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

पुन्नाप्रा-परावूर स्थित अपने निवास पर संवाददाता सम्मेलन में श्री सुधाकरण ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन के बिना चुनावी मैदान में उतरेंगे। श्री सुधाकरण ने दशकों माकपा की सेवा की है और उन्होंने अलाप्पुझा जिले में पार्टी को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभायी है। संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन कम्युनिस्ट आदर्शों को नहीं छोड़ा है।

उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी से संगठनात्मक संबंध समाप्त कर दिया है, लेकिन मैं कम्युनिस्ट सिद्धांतों में विश्वास करना और उन्हें बनाये रखना जारी रखूंगा।" उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उन पर व्यक्तिगत हमला करने की कोशिशें खुद पार्टी को ही नुकसान पहुंचा सकती हैं।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान दिये गये योगदान को पार्टी के प्रकाशनों और मीडिया कवरेज में जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। पेरुम्बलम पुल परियोजना पर मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि बड़े विकास कार्यों को शुरू करने और उन्हें निष्पादित करने में उनकी भूमिका को भी जानबूझकर हटा दिया गया। उनके अनुसार, ऐसे फैसले संपादकों ने नहीं किये, बल्कि पार्टी के भीतर निहित स्वार्थों से प्रभावित थे।

श्री सुधाकरण ने बताया कि बुधवार देर रात जिला सचिव आर नासर और नेता सीएस सुजाता सहित माकपा के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह उनके आवास आया था, ताकि उन्हें पार्टी न छोड़ने के लिए मनाया जा सके।

खबरों के अनुसार, उन्होंने श्री सुधाकरण से संवाददाता सम्मेलन रद्द कर और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। श्री सुधाकरण ने हालांकि उन्हें सूचित कर दिया था कि उनका निर्णय अडिग है और इसमें बदलाव संभव नहीं।

उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उनसे फोन पर बात की थी। श्री सुधाकरण ने कहा कि हो सकता है मुख्यमंत्री ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की हो, लेकिन उनके बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन के करीबी सहयोगी के रूप में जाने जाने वाले श्री सुधाकरण, अच्युतानंदन गुट के कमजोर होने के बाद भी पार्टी के भीतर बने रहे थे। हाल में उन्होंने दरकिनार किये जाने और संगठन के भीतर अपनी भूमिका को कम करने के जानबूझकर किए गए प्रयासों की सार्वजनिक शिकायत की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंबालाप्पुझा में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के उनके फैसले से यह चुनाव क्षेत्र हाई-प्रोफाइल राजनीतिक युद्ध के मैदान में बदल सकता है। इस घटनाक्रम की तुलना दिग्गज कम्युनिस्ट नेता के आर गौरी अम्मा से जुड़े ऐतिहासिक विभाजन से भी की जा रही है, जिसने कभी अलाप्पुझा में पार्टी के आधार को हिलाकर रख दिया था।

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