तिरुवनंतपुरम , मई 18 -- केरल की नयी कांग्रेस-नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णयों में से एक के तहत पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के दौरान अलाप्पुझा में 'नव केरल सदास' यात्रा के दौरान भड़की हिंसा की नये सिरे से जांच के आदेश दिये हैं।
नये मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की अध्यक्षता में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में उस घटना के दौरान पुलिस की बर्बरता, राजनीतिक हिंसा और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन करने का फैसला किया गया है। उस घटना ने पूरे राज्य में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।
यह कदम अदालत की उन पिछली टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में आया है, जिनमें मूल जांच के तरीके की आलोचना की गयी थी और पुलिस रिकॉर्ड और केस डायरियों में कथित विसंगतियों पर सवाल उठाये गये थे। नयी सरकार ने उन सभी संबंधित फाइलों को दोबारा खोलने का फैसला किया है, जिन्हें पिछली सरकार के दौरान कथित तौर पर दबा दिया गया था या कमजोर कर दिया गया था। यह घटना अलाप्पुझा में पूर्व मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों के नेतृत्व में निकली 'नव केरल सदस' यात्रा के दौरान हुई थी।
मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाने वाले युवा कांग्रेस और केरल स्टूडेंट यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं को पुलिसकर्मियों, मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम के सदस्यों और माकपा-डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर दौड़ा-दौड़ा कर बेरहमी से पीटा था। सड़क के किनारे खून से लथपथ प्रदर्शनकारियों की पिटाई के दृश्यों ने उस समय व्यापक जन-आक्रोश और राजनीतिक विवाद को जन्म दिया था। तत्कालीन एलडीएफ सरकार ने पुलिस की इस कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए किया गया एक 'बचाव अभियान' बताया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की यह टिप्पणी बाद में उस दौर के सबसे चर्चित राजनीतिक बयानों में से एक बन गयी थी। इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने वालों में युवा कांग्रेस के नेता के जे वर्गीज भी शामिल थे, जिन्हें माकपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर पुलिस की लाठियों और हेलमेट से पीटा था। सिर में चोट लगने और सड़क पर गिर जाने के बाद भी, कथित तौर पर घायल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ही पुलिस मामले दर्ज कर लिये गये थे। एक नाटकीय राजनीतिक उलटफेर में विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की प्रचंड जीत के बाद श्री वर्गीज अब अलाप्पुझा जिले से सत्ताधारी मोर्चे के विधायक के रूप में केरल विधानसभा में हैं।
राजनीतिक क्षेत्रों में अब इस जांच को एक कानूनी प्रक्रिया और पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान की सबसे विवादास्पद घटनाओं में से एक के प्रति प्रतीकात्मक राजनीतिक जवाब के रूप में देख रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की सीधे गृह विभाग से निगरानी होने की उम्मीद है। सरकारी उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा पूर्व मुख्यमंत्री के गनमैन, सुरक्षा अधिकारियों, स्थानीय माकपा नेताओं और उन पुलिस अधिकारियों तक बढ़ सकता है, जिन्होंने कथित तौर पर इस हमले में भाग लिया था या इसे बढ़ावा दिया था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित