तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 04 -- केरलम सरकार ने एमसी रोड विकास परियोजना से जुड़े मलेशियाई परियोजना प्रबंधक द्वारा 2006 में की गई आत्महत्या के मामले की नए सिरे से सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम कथित रूप से सुसाइड नोट में सामने आया था जो उस समय लोक निर्माण विभाग के सचिव थे।
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सतर्कता और भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो (वीएसीबी) को इस मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है। इसमें उन आरोपों की जांच भी शामिल है कि शुरुआती जांच बाहरी दबाव के कारण प्रभावित या बाधित हुई थी।
यह मामला पीएटीआई-बीईएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक ली सी बीन से संबंधित है, जो केरलम राज्य परिवहन परियोजना (केएसटीपी) के तहत एमसी रोड के विकास में शामिल एक भारत-मलेशियाई कंसोर्टियम था। ली ने 2006 में कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी। घटना के समय श्री कुमार केरलम में पीडब्लूडी सचिव के पद पर कार्यरत थे।
यह मामला तब सामने आया जब आरोप लगे कि ली पर इस परियोजना के सिलसिले में, खासकर बिलों एवं भुगतान को मंज़ूरी दिलाने को लेकर, बहुत ज़्यादा दबाव था। रिपोर्ट के अनुसार, उनके सुसाइड नोट में अधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने और गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे और उसमें श्री कुमार के नाम का भी उल्लेख था।
ली की मौत के बाद, तत्कालीन एलडीएफ सरकार ने इन आरोपों की सतर्कता जांच के आदेश दिए। सतर्कता और भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो ने शुरुआती जांच की लेकिन इस जांच के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शुरुआती जांच के तरीके पर सवाल उठने के बाद यह मामला फिर से सामने आया है। गृह विभाग ने इस मामले से जुड़ी पुरानी सतर्कता फाइलें मांगी थीं और रिपोर्ट से पता चला कि जांच से जुड़े कुछ रिकॉर्ड आसानी से नहीं मिल सके।
ली की मौत से जुड़े हालात और परियोजना को लेकर लगाए गए आरोपों की दोबारा जांच की मांग वाली शिकायत के बाद यह नई जांच शुरू की गई। केपीसीसी की कार्यकारी समिति के सदस्य मलयिनकीज़ु वेणुगोपाल ने भी अधिकारियों से संपर्क करके इस मामले को फिर से खोलने की मांग की थी।
पीएटीआई-बीईएल कंसोर्टियम ने केएसटीपी के तहत एमसी रोड के एक बड़े हिस्से का उन्नयन करने का काम हाथ में लिया था। इस परियोजना की शुरुआती लागत लगभग 216 करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन बाद में लागत काफी बढ़ गई। परियोजना में देरी भी हुई, जिसमें ज़मीन अधिग्रहण एवं बिलों के भुगतान से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आई थीं।
केरलम के पूर्व वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस इसाक ने हाल ही में ली की मौत से जुड़े मामले और आरोपों का उल्लेख करके इस विवाद को फिर से हवा दी है। श्री थॉमस ने कहा कि सुसाइड नोट में अधिकारियों द्वारा परेशान करने और पैसे की मांग करने के आरोप थे और इन आरोपों के सिलसिले में जिन लोगों का उल्लेख किया गया था उनमें श्री कुमार भी शामिल थे।
श्री थॉमस ने यह भी कहा है कि ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के बीच देरी और भुगतान संबंधी विवादों को लेकर परियोजना गंभीर समस्याओं में फंस गई थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुसाइड नोट नहीं देखा था और उस समय सामने आई जानकारियों का हवाला दे रहे थे।
उस समय की रिपोर्टों में कहा गया था कि बढ़ती मुश्किलों के बीच ली मलेशिया लौट आए और बाद में कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली। मलेशियाई अधिकारियों ने कथित रूप से दो सुसाइड नोट बरामद किए थे।
शुरुआती सतर्कता जांच से जुड़े हालात भी फिर से जांच के दायरे में आ गए हैं, खासकर वे आरोप कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ी और बाद में कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाए।
सतर्कता विभाग की नई जांच में ली की मौत से जुड़े आरोपों, एमसी रोड परियोजना से जुड़े हालात, सुसाइड नोट की बातों और उसके असर, आरोपों में नाम आए अधिकारियों की भूमिका और पहले हुई जांच के तरीके की पड़ताल की जाएगी।
यह घटनाक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर श्री कुमार के आस-पास चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है। विपक्षी पार्टियां और कई संगठन इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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