तिरुवनंतपुरम , नवंबर 02 -- केरलम राज्य वन्यजीव बोर्ड के पुनर्गठन में सत्ताधारी गठबंधन (यूडीएफ) समर्थित प्रमुख पर्यावरणविदों और संरक्षण कार्यकर्ताओं को बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। बोर्ड में कुछ ऐसे सदस्यों के चयन पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिन पर पर्यावरणविदों द्वारा अतीत में वन और वन्यजीव संरक्षण पहलों का विरोध करने के आरोप लगे हैं।

इस बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं और वन एवं वन्यजीव मंत्री इसके उपाध्यक्ष हैं। इसके विधायी सदस्यों में केरल कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के प्रतिनिधि शामिल हैं। उल्लास कोवूर, अधिवक्ता सेबेस्टियन एमजे और सीके कासिम को विधायिका का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य के रूप में नामित किया गया है। पलक्कड़ के फादर साजी जोसेफ वट्टुकुलम और वायनाड के केपी एलियास को किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किया गया है।

एलियास के नामांकन पर पर्यावरणविदों ने विशेष रूप से आपत्ति जताई है। आलोचकों का सवाल है कि जिस व्यक्ति को वे वन और वन्यजीव संरक्षण का विरोधी मानते हैं, उसे इस वैधानिक निकाय में कैसे चुना गया? संरक्षण कार्यकर्ताओं का दावा है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट वन और पर्यावरण संरक्षण पहलों के खिलाफ हैं। इन पोस्टों का हवाला देकर ही वे अपनी आपत्तियों को पुष्ट कर रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी स्थित एक संगठन के दो प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने पर भी लोगों का ध्यान गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुनर्गठित बोर्ड में एक विशेष समुदाय को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है। नामित सदस्यों में से तीन के बारे में कहा जा रहा है कि वे माकपा से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार आदिवासी प्रतिनिधियों के चयन के मामले में 'आदिवासी कांग्रेस' से कोई परामर्श न लेना भी विवाद का विषय बन गया है।

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