मलप्पुरम , मई 11 -- केरल के तिरूर जिले के उप-जिलाधिकारी दिलीप कैनिकारा की एक फेसबुक पोस्ट ने राज्य के प्रशासनिक और नीतिगत हलकों में बहस छेड़ दी है जिसमें उन्होंने सुधार के कई महत्वाकांक्षी विचार रखे हैं।

इनमें मलप्पुरम जिले का प्रस्तावित विभाजन, सेवानिवृत्ति की आयु के नियमों में बदलाव और पर्यटन व सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए 'नाइटलाइफ़ इकोनॉमी' को प्रोत्साहन देना शामिल है।

जिलों के पुनर्गठन को सुधार की मुख्य प्राथमिकता बताते हुए अधिकारी ने तर्क दिया कि अत्यधिक बड़े जिले प्रशासनिक कठिनाइयाँ पैदा करते हैं और सरकारी सेवाओं तक जनता की पहुंच को कम करते हैं।

श्री कैनिकारा ने कहा कि एक आदर्श जिले में लगभग सात विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए, जो मोटे तौर पर एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के बराबर हों। उन्होंने सुझाव दिया कि व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत केरल के सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में से एक, मलप्पुरम को विभाजित किया जा सकता है।

उप-जिलाधिकारी ने हालांकि यह स्वीकार किया कि इस तरह के पुनर्गठन में काफी वित्तीय खर्च आएगा, लेकिन शासन की दक्षता और सार्वजनिक सुविधा में मिलने वाले दीर्घकालिक लाभ इसे एक 'सार्थक निवेश' बनाएंगे।

श्री कैनिकारा ने कहा कि इन सुधारों को 2029 तक की अवधि के दौरान लागू किया जा सकता है, जब केरल में किसी बड़े चुनाव की संभावना नहीं है। पोस्ट के अनुसार, तत्काल चुनावी दबाव न होने से सरकार को ऐसे कदम उठाने की गुंजाइश मिलती है, जिन्हें अल्पावधि में विरोध का सामना करना पड़ सकता है लेकिन वे समाज को दीर्घकालिक लाभ दे सकते हैं।

पोस्ट में एक अन्य प्रमुख प्रस्ताव सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का था। केरल की उच्च जीवन प्रत्याशा और बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों का हवाला देते हुए अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों को 56 वर्ष में सेवानिवृत्त करना और तुरंत पेंशन भुगतान शुरू करना 'हर लिहाज से तर्कहीन' है। उन्होंने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति की आदर्श आयु 60 वर्ष होनी चाहिए, जबकि इसे बढ़ाकर 58 वर्ष करने से भी मानव संसाधनों भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।

अधिकारी ने पर्यटन को मजबूत करने और सेवा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए केरल में नाइटलाइफ़ को बढ़ावा देने की भी वकालत की। पोस्ट के अनुसार, एक जीवंत नाइटलाइफ़ अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन और व्यापक आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

शिक्षा के मोर्चे पर, श्री कैनिकारा ने प्रस्ताव दिया कि मलयालम माध्यम की शिक्षा मुख्य रूप से प्राथमिकी स्तर तक सीमित होनी चाहिए, जबकि माध्यमिक, उच्च विद्यालय और उच्चतर विद्यालयी शिक्षा को धीरे-धीरे अंग्रेजी माध्यम में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि अधिकारी द्वारा कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन की प्रशंसा करने के बाद पोस्ट ने और अधिक राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने श्री सतीशन को एक सक्षम नेता बताया जो मलप्पुरम और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर साहसी निर्णय लेने के इच्छुक हैं।

इस फेसबुक पोस्ट पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं हुई हैं। कुछ लोग प्रशासनिक दक्षता और शैक्षिक सुधार पर जोर देने का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य भाषा नीति, सेवानिवृत्ति की आयु और जिला विभाजन से संबंधित प्रस्तावों की आलोचना कर रहे हैं।

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