बेंगलुरु , सितंबर 07 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को 400 पशुचिकित्सा अधिकारी पदों पर भर्ती में हुए कथित घोटाले के मामले में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के निलंबित अध्यक्ष साहुकार एस शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस दौरान न्यायालय ने प्रतियोगी परीक्षाओं से जनता के विश्वास के खत्म होने पर गहरी चिंता व्यक्त की।
न्यायमूर्ति एस विश्वजीत शेट्टी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, "जनता का परीक्षा प्रणाली से भरोसा उठता जा रहा है। हमने देखा है कि नीट के पेपर लीक के कारण कितने होनहार छात्रों ने आत्महत्याएं की हैं। इतने सारे... उनका क्या कसूर था?"न्यायमूर्ति शेट्टी ने कहा, "इन चीजों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"यह मामला केपीएससी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी, प्रश्नपत्रों तक समय से पहले पहुंच, ओएमआरउत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और चुनिंदा उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए अंकों में हेरफेर के आरोपों से संबंधित है। जांच में आरोप लगाया गया है कि बिचौलियों ने 70-80 लाख रुपये में नियुक्ति दिलाने का वादा कर उम्मीदवारों से संपर्क किया था। यह परीक्षा पशुचिकित्सा अधिकारी के 400 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गयी थी।
अभियोजन पक्ष का यह भी आरोप है कि केपीएससी अधिकारियों के रिश्तेदारों ने असामान्य रूप से उच्च अंक प्राप्त किए और कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही परीक्षा सामग्री उपलब्ध करा दी गयी थी।
शिवशंकरप्पा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम अरुणा श्याम ने उनकी उम्र, हाल ही में हुई सर्जरी के बाद के स्वास्थ्य और किसी भी तरह का आपराधिक इतिहास न होने का हवाला देते हुए राहत की मांग की। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मीडिया इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहा है।
लोक अभियोजक बी एन जगदीश ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि केपीएससी अध्यक्ष ने 'पूरी व्यवस्था का मज़ाक बनाकर रख दिया' और निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है।
निचली अदालत ने आरोपों की गंभीरता, हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता और गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना का हवाला देते हुए 11 अगस्त को ही शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने से इनकार कर दिया।
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